Aatmaj

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199.00 149.00

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199.00 149.00

Author: Vinay Kumar

Availability: 5 in stock

Pages: 96

Year: 2024

Binding: Paperback

ISBN: 9789360861698

Language: Hindi

Publisher: Rajkamal Prakashan

Description

आत्मज

रंगमंच का कविता से बड़ा गहरा रिश्ता है। नाटक को दृश्य-काव्य भी कहा गया है। विनय कुमार के काव्य-नाटक आत्मज को आधुनिक हिन्दी रंगमंच को आन्दोलित करनेवाले काव्य नाटकों की परम्परा से जोड़कर देखा जा सकता है। कवि ने अपने इस नाटक के कथ्य को एक विलक्षण शैलीबद्धता के साथ अभिव्यक्त किया है। इस शैलीबद्धता में कहीं शब्दों के माध्यम से, तो कहीं शब्दों के बीच छिपी अमूर्त दृश्यता के माध्यम से जीवन का यथार्थ चाक्षुष रूप ग्रहण करता है।

यहाँ जीवन की अनुकृति नहीं, अनुकीर्तन है, जिसकी आभा में अन्तर्द्वन्द्वों की ऐसी छवियाँ देखी जा सकती हैं जिनसे हमारे समय और समाज के दार्शनिक सत्य प्रकट होते हैं।

आत्मज में इतिहास पारम्परिक अर्थों में उपलब्ध नहीं है। इसके पात्र भी ठीक उस तरह उपलब्ध नहीं हैं, जैसे वे तथाकथित इतिहास के गह्वरों से झाँकते रहे हैं। आंशिक या पूर्ण पितृहीनता के संकटों और दुखों से बिंधे ये पात्र ऐतिहासिक से अधिक आधुनिक हैं, और वे जीवन और जगत में पितृ-तत्त्व के क्षरण के बीच एक बेधक पुकार की तरह उपस्थित होते हैं। ग़ौरतलब है कि इस नाट्यरचना के तन्तु इतिहास के मौन से बुने गये हैं। रंगमंच पर मौन एक युक्ति है और वह प्रस्तुति के दौरान सर्वाधिक मुखर होता है। इस नाट्यालेख में इतिहास का मौन, कविता के मौन और रंगमंच के मौन के साथ मिल कर जो रंगभाषा रचता है, उससे उन ध्वनियों और दृश्यों की रचना होती है; जिससे दर्शक नई नाट्यानुभूति अर्जित कर सकते हैं और अपनी कल्पना के संस्पर्श से अपना भाव-पक्ष रच सकते हैं। आत्मज की रंगभाषा प्रस्तुति-प्रयोग के लिए रंगकर्मियों को आकर्षित करेगी और नाट्यालेख के भीतर विन्यस्त उपपाठ को संप्रेषित करने के लिए नई राहों की निर्मिति भी करेगी। भारतीय रंगमंच पर आत्मज  की उपस्थिति तकनीक के खेल वाले इस समय में शब्दों की गरिमा और शक्ति की वापसी है।

— हृषीकेश सुलभ

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Paperback

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Hindi

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Publishing Year

2024

Pulisher

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