Dinkar Rachanawali : Vols. 1-14

-18%

Dinkar Rachanawali : Vols. 1-14

blank

Dinkar Rachanawali : Vols. 1-14

5,000.00 4,100.00

In stock

5,000.00 4,100.00

Author: Ramdhari Singh Dinkar

Availability: 10 in stock

Pages: 6120

Year: 2021

Binding: Paperback

ISBN: 9788180315909

Language: Hindi

Publisher: Lokbharti Prakashan

Description

दिनकर रचनावली : भाग-1-14

(आधुनिक हिन्दी कविता के) तृतीय उत्थान में आकर परिस्थिति बहुत बदल गई। आन्दोलनों ने सक्रिय रूप धारण किया और गाँव–गाँव राजनीतिक और आर्थिक परतन्त्रता के विरोध की भावना जगाई गई। सरकार से कुछ माँगने के स्थान पर अब कवियों की वाणी देशवासियों को ही ‘स्वतन्त्रता देवी की वेदी पर बलिदान’ होने को प्रोत्साहित करने में लगी। अब जो आन्दोलन चले वे सामान्य जन–समुदाय को भी साथ लेकर चले। अब संसार के प्रायः सारे सभ्य भाग एक–दूसरे के लिए खुले हुए हैं। इससे एक भू–खंड में उठी हवाएँ दूसरे भू–खंड में शिक्षित वर्गों तक तो अवश्य ही पहुँच जाती हैं। यदि उनका सामंजस्य दूसरे भू–खंड की परिस्थिति के साथ हो जाता है तो उस परिस्थिति के अनुरूप शक्तिशाली आन्दोलन चल पड़ते हैं।

इसी नियम के अनुसार शोषक साम्राज्यवाद के विरुद्ध राजनीतिक आन्दोलन के अतिरिक्त यहाँ भी किसान–आन्दोलन, मजदूर–आन्दोलन, अछूत–आन्दोलन इत्यादि कई आन्दोलन एक विराट् परिवर्तनवाद के नाना व्यावहारिक अंगों के रूप में चले। श्री रामधारी सिंह दिनकर, बालकृष्ण शर्मा ‘नवीन’, माखनलाल चतुर्वेदी आदि कई कवियों की वाणी द्वारा ये भिन्न–भिन्न प्रकार के आन्दोलन प्रति वनित हुए।

Additional information

Authors

Binding

Paperback

ISBN

9788180315909

Language

Hindi

Pages

6120

Publishing Year

2021

Pulisher

Reviews

There are no reviews yet.


Be the first to review “Dinkar Rachanawali : Vols. 1-14”

You've just added this product to the cart:

error: Content is protected !!