Kahani Samagra : Nasera Sharma (3 Vols.)

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Kahani Samagra : Nasera Sharma (3 Vols.)

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Kahani Samagra : Nasera Sharma (3 Vols.)

2,100.00 1,800.00

In stock

2,100.00 1,800.00

Author: Nasira Sharma

Availability: 5 in stock

Pages: 1470

Year: 2011

Binding: Hardbound

ISBN: 9789381467039

Language: Hindi

Publisher: Kitabghar Prakashan

Description

प्रख्यात कथा-लेखिका नासिरा शर्मा की कहानियाँ  समकालीन स्त्री रचनाकारों की कहानियों से कई मायनों में अलग और सर्वथा नई परिभाषा गढ़ती हुई नजर आती हैं। उनके यहाँ इनसानी रिश्ते केवल खून से ही नहीं, संवेदनाओं के उन तंतुओं से निर्मित होते हैं, जो इनसानियत के वजूद को बचाए रखने के लिए जारी हैं।

पहले खंड की कहानियाँ परिवार, देश-समाज की सीमा को लाँघते हुए ईरान तक की यात्रा कराती हैं। ईरान के अपने प्रवास काल के दौरान लेखिका ने जिस शिद्दत से वहाँ की जीवनशैली, संस्कृति को आत्मसात् किया, उसको बहुत प्रभावी ढंग से उन्होंने इन कहानियों में अभिव्यक्त भी किया है।  इस बहाने भारत और ईरान के प्राचीन रिश्तों की भी लेखिका शिनाख्त करती हैं।

इस खंड की कई कहानियों में लेखिका अपने अतीत के पन्ने उलटते हुए उन क्षणों को वर्तमान संदर्भों से पुनः जीवंत करने का प्रयत्न करती है, जिन पर समय की बेशुमार परतें चढ़ चुकी हैं। दरअसल इन कहानियों के जरिए लेखिका अपने अतीत में घटित उन सामाजिक-राजनीतिक घटनाओं की पड़ताल बदले हुए समय में करती हैं, जिनका संबंध वर्तमान से विच्छेद नहीं हुआ है।

दूसरे खंड की कहानियाँ इनसान के भीतर मौजूद शैतान को बाहर खींच निकालती हैं। सत्तालोलुपता की हवस में इनसान के हैवान में रूपांतरण की ये कहानियाँ अनेक सवालों को उठाती हैं। धर्म-स्थापना के नाम पर किसी भी प्रकार के अधार्मिक और अमानवीय क्रियाकलापों को जायज़ ठहराने वाली बीमार मानसिकता को भी ये कहानियाँ अनावृत करती हैं। इन कहानियों में समाज के निचले तबके के उन लोगों के दारुण यथार्थ की तस्वीर भी मौजूद है, जो अपना सब कुछ न्योछावर करके किसी भी देश-समाज की सांस्कृतिक नींव तैयार करते हैं। बावजूद इसके शक्तिसंपन्न और सामंती मानसिकता के लोग उनका शोषण करना अपना अधिकार समझते हैं।

तीसरे खंड में लेखिका द्वारा पिछले तीन दशक में लिखी गई कहानियाँ सम्मिलित हैं। इनमें कुछ लंबी और कुछ लघु कथाएँ भी हैं। कथानक और घटनाक्रम के आधार पर इस खंड की कहानियाँ पूर्ववर्ती दो खंडों की कहानियों से कुछ अलग नजर आती हैं। इसका कारण यह है कि इस खंड की कहानियों में लेखिका ने अपनी दृष्टि के विस्तार को थोड़ा संघनित किया है। यही वजह है कि इनमें देश-समाज-राजनीति-इतिहास से जुड़ी कहानियों के स्थान पर इनसानी नस्ल की प्रवृतियों पर आधारित कहानियाँ पढ़ने को मिलती हैं। बहुत कम लेखक ऐसे होते हैं, जिनकी आँखें बारीक़ से बारीक रेशे को पकड़ती हैं, जिनके कान महीन से महीन आवाज को सुनते हैं और नाक हलकी से हलकी गंध ग्रहण करती है। ऐसे लेखकों को हम सहस्राक्षी लेखक भी कह सकते हैं। नासिरा शर्मा भी ऐसी ही लेखिका।

इनसानी मनोविज्ञान का गहन विश्लेषण करती ये कहानियाँ लेखिका के भाषा-प्रवाह और ट्रीटमेंट के प्रति सजगता को भी प्रमाणित करती हैं।

Additional information

Authors

Binding

Hardbound

ISBN

9789381467039

Language

Hindi

Pages

1470

Publishing Year

2011

Pulisher

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