Banaras BHU Aur Shriprakash Shukla

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Banaras BHU Aur Shriprakash Shukla

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425.00 335.00

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425.00 335.00

Author: Aryaputr Deepak, Akshat Pandey

Availability: 5 in stock

Pages: 299

Year: 2025

Binding: Paperback

ISBN: 9789362014177

Language: Hindi

Publisher: Setu Prakashan

Description

बनारस, बीएचयू और श्रीप्रकाश शुक्ल

बीएचयू से श्रीप्रकाश शुक्ल का रूमानी लगाव है तो बनारस से यथार्थपरक। इलाहाबादी ज्ञान परम्परा में दीक्षित व प्रशिक्षित होते हुए नौकरी के सन्दर्भ में बीएचयू को पाना इनका ‘परम लक्ष्य’ था तो बनारस को जीना ‘चरम लक्ष्य’। कहते भी हैं कि यहाँ आने के बाद कहीं जाने का मन नहीं किया। खूँटा यहीं गड़ा, बस पगहा बड़ा करता गया। दिल बीएचयू वाला। जिन्दादिली बनारस की। यही इनकी जीवन्तता का राज भी है और मैं यहीं से इनको वर्षों से देखता रहा हूँ। इनके सन्दर्भ से इस पुस्तक के माध्यम से इसी बनारस व बीएचयू के सन्दर्भ में इनकी जागृति को समझना है। इनके साहित्य पर खूब लिखा गया। आगे भी बहुत कुछ लिखा जाएगा लेकिन वह तब तक पूरा नहीं होगा जब तक इनके साहित्य के नेपथ्य को नहीं समझा जाए। हम पथारोही छात्रों की ओर से यह पुस्तक उसी नेपथ्य को पथ्य व पाठ्य बनाने की एक विनम्र कोशिश है। हर लेखक का अपना पार्श्व होता है। उम्मीद है इस पुस्तक के माध्यम से इनका पार्श्व सम्मुख होगा और इन दिनों ये खुद भी ‘सम्मुख बनारस’ को शब्दबद्ध करने में लगे हैं। कोई कितना भी विमुख हो, इनका सम्मुख होना उसे भी मोह ही लेता है। भटकी हुई आत्माएँ और छिटके हुए लोगों के बारे में हमेशा कहते हैं कि ये अपने ही अंश हैं। मुक्तिबोध को याद करते हैं- व्यक्तित्व अपना अपने से ही खोया हुआ, और मजा भी लेते हैं कि अमृत का स्वाद बगैर विष के लिया तो जा सकता है लेकिन उसमें आनन्द नहीं होगा। कमलेश वर्मा जी ठीक ही कहते हैं कि श्रीप्रकाश शुक्ल के पास ‘मोहिनी मन्त्र’ है जिसके माध्यम से इनके ‘निन्दक’ भी इनके ‘नन्दक’ हो जाते हैं। श्रीप्रकाश शुक्ल अनथक, अपराजेय जिजीविषा के व्यक्ति हैं। वे समय, समाज और साहित्य से निरन्तर संवाद कर अपने लोकवृत्त का निर्माण करते हैं। संवाद की इस प्रक्रिया में वे अनगढ़ को गढ़ते हैं, अनकहे को कहते हैं और अनछुए को हाथोहाथ लेकर तराशते हैं।

– भूमिका से

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Authors

Binding

Paperback

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2025

Pulisher

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