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Description
औरत तीन तस्वीरें
स्त्री विमर्श के क्षेत्र में शरद सिंह का नाम सुपरिचित है। अपनी नव्यतम पुस्तक ‘औरत : तीन तस्वीरें’ में उन्होंने स्त्री को तीन स्तरों में विभाजित किया है। ये हैं- अपने साहस, क्षमता और योग्यता को साबित करके पुरुषों की बराबरी करते हुए पहली पांत में आनेवाली स्त्रियां। साहित्य व विचारों की दुनिया में अपने समर्थ स्वरूप के साथ प्रस्तुत स्त्रियांं और प्रताड़ना के साए में संघर्षरत स्त्रियां।
यहां वह एक ओर शर्मिला इरोम सरीखी जीवट वाली स्त्रियों को तो विचार के दायरे में लेती ही हैं, देश–विदेश में अपनी पहचान स्थापित करती महिलाओं को भी रेखांकित करती हैं। उनकी नजर एक तरफ स्त्री के अधिकारों की लोककथा पर टिकी रहती है और दूसरी तरफ वह मदनमोहन मालवीय, नागार्जुन और रवीन्द्रनाथ की स्त्रियों की बात भी करती हैं।
उनकी सोच के दायरे में जहां सेक्स वर्कर्स का पुनर्वास रहता है, वहीं भारतीय मुस्लिम महिलाओं का भविष्य भी। अच्छी बात यह है कि इस दायरे में वह सोच का एक नया समाजशास्त्र भी गढ़ने की कोशिश में हैं जहां आधी दुनिया अलग–थलग न पड़ी रह जाए।
इसके पाठक यह महसूस करेंगे कि विचार एक सामूहिक प्रक्रिया है। कहना जरूरी है कि अपने विषयों की विविधता के लिए जाने जानी वाली शरद सिंह की यह पुस्तक ‘पत्तों में कैद औरतों’ से आगे निकलकर स्त्रियों के लिए एक नया आकाश सामने रखती है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2017 |
| Pulisher |











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