Nirmal Man

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Nirmal Man

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190.00 180.00

Author: Sriramkinkar Ji Maharaj

Availability: 4 in stock

Pages: 173

Year: 2015

Binding: Paperback

ISBN: 0

Language: Hindi

Publisher: Ramayanam Trust

Description

निर्मल मन

।। श्री रामः शरणं मम ।।

प्रथम प्रवचन

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।

बरनउँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि।।

बरषा बिगत सरद रितु आई। लछिमन देखहु परम सुहाई।।

फूलें कास सकल महि छाई। जनु बरषाँ कृत प्रगट बुढ़ाई।।

उदित अगस्ति पंथ जल सोषा। जिमि लोभहि सोषइ संतोषा।।

सरिता सर निर्मल जल सोहा। संत हृदय जस गत मद मोहा।।

रस रस सूख सरित सर पानी। ममता त्याग करहिं जिमि ग्यानी।।

जानि सरद रितु खंजन आए। पाइ समय जिमि सुकृत सुहाए।।

पंक न रेनु सोह असि धरनी। नीति निपुन नृप कै जस करनी।।

जल संकोच बिकल भइँ मीना। अबुध कुटुंबी जिमि धनहीना।।

बिनु घन निर्मल सोह अकासा। हरिजन इव परिहरि सब आसा।।

कहुँ कहुँ बृष्टि सारदी थोरी। कोउ एक पाव भगति जिमि मोरी।।

चले हरषि तजि नगर नृप, तापस बनिक भिखारि।

जिमि हरि भगति पाइ श्रम, तजहिं आश्रमी चारि।। 4/16

आज शरद् पूर्णिमा है। इस संकेत बिन्दु को ही आधार बनाकर आपके समक्ष कुछ बातें रखने की चेष्टा की जायेगी। प्रत्येक मास में एक बार और वर्ष में बारह मासों में बारह बार पूर्णिमा आती हैं। किन्तु इन समस्त पूर्णिमाओं में शरद् पूर्णिमा को ही सबसे अधिक महत्त्व दिया जाता है। इसका तात्पर्य क्या है ? हमारे सनातन धर्म तथा हमारी संस्कृति में असंख्य पर्व हैं, और ये पर्व शक्ति को बहिरंग अर्थों में भी उत्साह और उल्लास प्रदान करते हैं। जब हम किसी विशेष पर्व पर उत्सव मनाते हैं, अपने स्वजन, परिवार तथा अन्य लोगों के साथ उसमें सम्मिलित होते हैं, तब वह उत्सव बहिरंग अर्थों में भी लोगों के उत्साह का केन्द्र बन जाता है। पर इन उत्सवों का उद्देश्य केवल इतना ही नहीं है। इन पर्वों का सामाजिक जीवन में महत्त्व तो है ही, पर जब हम इसके अन्तरंग में पैठकर विचार करते हैं, तब इन पर्वों और तिथियों में जो निहित संकेत हैं, उन्हें समझ पाते हैं। अगर हम इन संकेतों को सही अर्थों में ग्रहण कर सकें और जीवन में उससे प्रेरणा ले सकें, तो ये पर्व व्यक्ति और समाज के लिये और भी अधिक कल्याणकारी सिद्ध हो सकते हैं।

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Paperback

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Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2015

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