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Description
सूखे सुनसान नालों में
शिकार की लोकप्रिय पुस्तकों के प्रसिद्ध लेखक श्रीनिधि सिद्धान्तालंकार का नाम शिकार-साहित्य के प्रेमियों के लिए सुपरिचित है।
प्रस्तुत पुस्तक में वन्य-जीवन का लेखक ने अपने अनुभव के आधार पर ऐसा सरल, रोचक और सरस चित्रण किया है कि पुस्तक को पढ़ना प्रारम्भ करने पर पुस्तक कब खत्म हो जाती है, इसका पता ही नहीं चलता।
हिंस्र पशुओं से होने वाली भीषण मुठभेड़ों का लेखक ने अद्भुत क्षमता से चित्रण किया है।
इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय वन अकादमी के निदेशक श्री विनोद द्वारा बनाए गए चित्र पुस्तक में दिए गए हैं जिनसे पुस्तक का महत्त्व और भी बढ़ गया है।
समर्पण
स्नेहमयी माँ को
जिन्होंने भगवान देवी के नाम से इस धरती पर सत्तर वर्ष बिताकर अपनी इस सन्तान को धन्य किया, जिनकी गोद में बैठकर वन्य-प्रेम का प्रथम पाठ पढ़ा, जो स्वयं वन्य-जीवन से अपार स्नेह रखती थीं और मुझे भी सदा उधर प्रवृत्त करती रहती थीं उन्हीं के चरणों में।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher | |
| Language | Hindi |











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