- Description
- Additional information
- Reviews (0)
Description
तुलसीदास
तुलसीदास राम भक्त कवि थे। राम का गुणगान करना उनकी कविता का मुख्य उद्देश्य था। तुलसी के राम गुणगान का अर्थ मात्र अवतारी पुरुष राम का गुणगान नहीं था, वरन् राम उन अच्छाइयों के भी प्रतीक थे जिन्हें वे सभी मनुष्यों में देखना चाहते थे। रामत्व (अच्छाई) की रावणत्व (बुराई) पर विजय की जो कल्पना इन्होंने की है, उसके मूल में उस समय की राजनीतिक दुर्व्यवस्था थी जिसकी तरफ़ उन्होंने अस्पष्ट रूप से संकेत किया था। तुलसीदास ने रामत्व की रावणत्व की विजय के द्वारा एक ऐसा आश्वासन भारतीय समाज को दिया जिसने गांधीजी का भी मार्ग प्रशस्त किया था। गांधी जी के स्वतन्त्रता आन्दोलन का मूल मंत्र राम राज्य ही रहा था। तुलसीदास ने जिन नैतिक मूल्यों की स्थापना की वे आज भी जनता के मनोबल को बढ़ानेवाले तथा हमारी युवा पीढ़ी को संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ानेवाले हैं।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |











Reviews
There are no reviews yet.