Bhashayee Asmita Aur Hindi

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Bhashayee Asmita Aur Hindi

Bhashayee Asmita Aur Hindi

450.00 338.00

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450.00 338.00

Author: Ravindranath Srivastava

Availability: 5 in stock

Pages: 228

Year: 2015

Binding: Hardbound

ISBN: 9788170552413

Language: Hindi

Publisher: Vani Prakashan

Description

भाषायी अस्मिता और हिन्दी

भाषा किसी भी भाषाई समुदाय के सदस्यों को अन्दरूनी तौर पर जोड़ने और बाँधने वाली एक जबर्दस्त ताकत के साथ-साथ एक संगठित समुदाय में अलगाव और बिखराव पैदा करने वाला एक हथियार भी है। भाषा में जोड़ने और तोड़ने वाली ताकत एक ही चीज के दो पहलू हैं, और वह चीज़ है सामाजिक अस्मिता।
हिन्दी न तो मात्र व्याकरण और न ही वह केवल विशिष्ट भाषिक संरचना है। भाषा के रूप में वह सामाजिक संस्था भी है, संस्कृति के रूप में वह सामाजिक प्रतीक भी है, और साहित्य के रूप में वह एक जातीय परम्परा भी है।
इस पुस्तक में संकलित लेखों में सामाजिक अस्मिता और भारतीय बहुभाषिकता के सन्दर्भ में हिन्दी भाषा के कुछ ऐसे पहलू पर विचार किया गया है जो एक ओर विद्वानों के लिए बहस के मुद्दे बने हुए हैं और दूसरी ओर हमारी भाषा-नीति पर आज प्रश्न चिह्न बने हुए हैं।

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Authors

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Hardbound

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2015

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