Parimal : Smritiyan Aur Dastavej

-26%

Parimal : Smritiyan Aur Dastavej

Parimal : Smritiyan Aur Dastavej

499.00 369.00

In stock

499.00 369.00

Author: Keshav Chandra Verma

Availability: 5 in stock

Pages: 376

Year: 2026

Binding: Paperback

ISBN: 9789377479657

Language: Hindi

Publisher: Lokbharti Prakashan

Description

परिमल : स्मृतियाँ और दस्तावेज

आज़ादी के बाद कला और संस्कृति के क्षेत्र में जो बदलाव हुए उनसे हिन्दी साहित्य में बड़े महत्त्वपूर्ण परिवर्तन हुए। इन परिवर्तनों के केन्द्र में पाँचवें और छठवें दशक ने काफी बदलाव दर्ज किये, जिनका मूल स्वरूप हिन्दी साहित्य-जगत की आपसी प्रतिस्पर्द्धा और अनर्गल प्रचार से धूमिल-सा हो गया।

इन मूलभूत बदलावों के केन्द्र में प्रायः इलाहाबाद की साहित्यिक संस्था ‘परिमल’ ने बहुतेरे मूल्यगत परिवर्तनों की शुरुआत की। यह काम किसी योजनाबद्ध तरीके से नहीं किया गया, बल्कि कुछ मनमौजी अलमस्त युवकों ने मिल-जुलकर एक साहित्यिक संस्था बनाई जिसका नाम ‘परिमल’ रखा। आज इतना वक़्त बीत जाने पर उस संस्था के कार्यों का जैसा महत्त्व ऐतिहासिक दृष्टि से बन गया है वह अपने आप में अचरज का विषय है। इसको लेकर बहुत-सी घटिया बातें ईर्ष्यालु लेखकों ने प्रचारित कीं। ऐसे में यह ज़रूरी हो गया कि ‘परिमल’ के एकाध लेखक जो बचे-खुचे रह गये हैं, वे भ्रमों का निराकरण करें और सही तथ्यों को सामने रखकर ‘परिमल’ का इतिहासपरक ब्योरा सामने रख दें। ‘परिमल : स्मृतियाँ और दस्तावेज़’ इसी आवश्यकता का प्रतिफल है। निश्चित ही, पाठकों को इस पुस्तक से हिन्दी साहित्य की एक अत्यन्त विवादास्पद बन चुकी घटना का यथार्थ चित्र मिलेगा।

Additional information

Authors

Binding

Paperback

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2026

Pulisher

Reviews

There are no reviews yet.


Be the first to review “Parimal : Smritiyan Aur Dastavej”

You've just added this product to the cart: