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Description
आधुनिक परिवार में स्त्री
स्त्री विमर्श के इस दौर में कमला सिंघवी जैसी चिंतनशील निबंधकार के विचार एक नया मोर्चा खोलते हैं। उनका मानना है कि इक्कीसवीं सदी में भारतीय नारी के समक्ष कई चुनौतियां हैं।
भारतीय महिलाओं को अधिकार तो अनेक मिले हैं, लेकिन यदि हमारा सामाजिक यथार्थ उसके अनुरूप नहीं है तो महिलाओं को स्वयं आगे आना होगा। वह स्त्री के घर के भीतर और बाहर दोनों मोर्चों पर महत्त्व को रेखांकित करती हैं। संस्कारिता को वह पूरी तरजीह देती हैं।
उनके लिए अनेक लोगों के जीवन-अनुभव विचार के सूत्र बने हैं। वह नारी की अनेक स्थितियों पर प्रश्न भर नहीं उठातीं, उनके समुचित समाधान भी खोजती हैं।
उनकी यह पुस्तक अपने अनेक अंशों में स्त्री-मन के उन कोनों-अंतरों में झांकती प्रतीत होती है जहां आसानी से प्रवेश संभव ही नहीं है।
सहज और बोधगम्य भाषा में यह अपनी तरह का स्त्री-विमर्श है जहां बौद्धिक व्यायाम के लिए कोई स्थान नहीं हैं।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2017 |
| Pulisher |











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