Aam Aurat : Zinda Sawal
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आम औरत : जिंदा सवाल
प्रखर, सचेत और दृष्टिसम्पन्न कथाकार सुधा अरोड़ा जन पक्षधरता की प्रबल और निष्ठावान पैरोकार होने के साथ–साथ, महिलाओं के अधिकारों के प्रति आवाज उठाने तथा महिलाओं की समस्याओं के लिए सतत कार्यरत हैं। उनकी कहानियों में ही नहीं, आलेखों में भी एक सुलझी और स्पष्ट दृष्टि मौजूद है। महिलाओं के बहुआयामी उत्पीड़न एवं पथराए मौन के खिलाफ उनकी संक्षिप्त, लेकिन बेबाक और ईमानदार टिप्पणियों ने भी हलचल पैदा की है।
‘आम औरत : जिंदा सवाल’ पुस्तक में सुधा अरोड़ा के चुनिंदा आलेखों को संगृहीत किया गया है। औरत की दुनिया के सामाजिक सरोकारों को अपने इसी मौलिक ढंग से खंगालना और बेहद आसान और सीधी सरल भाषा में खरी–खरी बात कहना इस पुस्तक के लेखों और टिप्पणियों की विशेषता है।
औरत को भारतीय सामाजिक पृष्ठभूमि में रखकर उसके लिए नैसर्गिक स्पेस की मांग सुधाजी के चिन्तन का बीजसूत्र रहा है । दलित और गांव–कस्बे की औरत से लेकर उच्च वर्ग की औरत की दैनंदिन समस्याओं के अतिरिक्त धर्म, मीडिया, फिल्म, साम्प्रदायिकता, नैतिक और सामाजिक मूल्य, घरेलू यौन शोषण और मानसिक यातना के विविध मुद्दों पर सुधा अरोड़ा एक साथ कई सवालों से टकराती हैं।
इस उत्तर… आधुनिक और ग्लोबल समय में स्त्री देह के भोगवादी नजरिये के विरुद्ध सुधा अरोड़ा का कारगर हस्तक्षेप रेखांकित करने योग्य है।
Additional information
| ISBN | |
|---|---|
| Authors | |
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2018 |
| Pulisher |











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