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Description
अभिनन्दन
साधारण समाज की रगों से निचुड़ा खून-पसीना राजनीति की मशीन में पहुँच कर किस प्रकार एक ‘भव्य अभिनन्दन’ बन कर ‘कुछ’ व्यक्तियों की सत्ता का आधारस्तम्भ बन जाता है-इस कटु तथ्य के आस-पास बुने ताने-बाने से यह उपन्यास-कृति निर्मित है। …सभी चेहरे हमारे-आपके जाने-पहचाने से लगते हैं। नाम कुछ और होंगे, जगहें कुछ और होंगी…घटनाओं का क्रम भी इसी प्रकार न हो तो क्या हुआ ? हमारी सामाजिक-साहित्यिक-राजनीतिक विडम्बना-भरी जिन्दगी पर एकदम अछूता और करारा व्यंग्य।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher |











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