Adhunik Vividh Kala Shabdsagar

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Adhunik Vividh Kala Shabdsagar

Adhunik Vividh Kala Shabdsagar

1,500.00 1,150.00

In stock

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Author: Roop Narayan Batham

Availability: 5 in stock

Pages: 296

Year: 2025

Binding: Hardbound

ISBN: 9789360865665

Language: Hindi

Publisher: Rajkamal Prakashan

Description

आधुनिक विविध कला शब्दसागर

‘आधुनिक विविध कला शब्दसागर’ तेईस आधुनिक सर्जनात्मक और व्यावसायिक कलाओं के सामान्य प्रचलित और महत्त्वपूर्ण शब्दों का संग्रह है। इसमें चित्रकला, मूर्तिकला, संगीत, नृत्य, नाटक, काव्य, फैशन, पाककला, गृहसज्जा, फोटोग्राफी, विज्ञान, फिल्म, टेलीविजन, संग्रहालय विज्ञान, पुरातत्त्व, अभिलेख, डिजाइन, शिल्प, सौन्दर्यशास्त्र, कला-समीक्षा, छापाकला आदि कलाओं से सम्बन्धित शब्द शामिल हैं।

कोश के आरम्भिक पृष्ठों में सभी कला विषयों के शब्दों को अंग्रेजी के वर्णक्रमानुसार प्रस्तुत किया गया है, जिसमें उसका वर्गीकरण, उच्चारण, हिन्दी पर्याय तथा साधारण शब्दों में उसकी सामान्य व्याख्या प्रस्तुत की गई है। अनेक कम प्रचलित किन्तु महत्त्वपूर्ण शब्दों के साथ कई अन्य तत्सम्बन्धित शब्दों के भी अंग्रेजी समानार्थी शब्द दिये गए हैं ताकि पाठक सहजता से कोश में प्रयुक्त शब्दों के भाव समझ सकें।

शब्दों के शुद्ध उच्चारण के सम्बन्ध में सदैव मतभेद रहा है, मुख्यतः विदेशी भाषाओं के सन्दर्भ में। इस समस्या के निदान के लिए इसमें विदेशी शब्दों के शुद्ध उच्चारण में एक व्यावहारिक समझौता किया गया है, जैसे— Colour के वास्तविक उच्चारण ‘कलअर’ के स्थान पर ‘कलर’ ही रखा है, इस प्रकार ‘अ’, (R) ‘र’ की ध्वनि से समझौता किया गया है। उसी तरह Art के शुद्ध उच्चारण में ‘आट’ के स्थान पर ‘आर्ट’ स्वीकारा है। नाटक के एक शब्द ‘Daddy’ के लिए ‘पितातुल्य’ प्रतिष्ठित ‘नाट्यकर्मी’ के साथ उर्दू के शब्द ‘उम्रदराज फनकार’ को भी लिया गया है। अंग्रेजी शब्दों के हिन्दी सुबोध पर्यायों के लिए विभिन्न भारतीय भाषाओं के बोलचाल से जुड़े अनेक शब्दों को स्वीकार किया गया है। जैसे—‘Dedicated Artist’ के लिए ‘जुझारू कलाकार’, ‘व्रती कलाकार’ आदि। शब्दों के अधिकाधिक पर्याय देने के प्रयास में उनके भावार्थ से जुड़े भाव को प्राथमिकता दी गई है। जैसे Design शब्द के 18 तो Aesthetics के 9 पर्याय दिये गए हैं।

यह कोश कभी-कभार कला के किसी शब्द की जानकारी मात्र देने वाला कोश नहीं है, कला के विद्यार्थियों, कला प्रेमियों और जिज्ञासुओं के लिए महत्त्वपूर्ण पाठ है। भारत में बहुउपयोगी कलाओं के समग्र कोश की रचना का यह सम्भवतः पहला प्रयास है, अतः इसमें अनेक त्रुटियों और कमियाँ रह गई होंगी। मुझे आशा है कि सुधी-पाठक इसे और समृद्ध करने के लिए अपने बहुमूल्य सुझावों से हमें अवगत करायेंगे।

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Authors

Binding

Hardbound

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Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2025

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