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Description
अँधेरे रोशनी के
“गैसलाइट” शब्द का प्रयोग अंग्रेज़ी भाषा व मनोविज्ञान की पारिभाषिक शब्दावली में आजकल इस अर्थ में होता है कि जब किसी एक व्यक्ति द्वारा किसी दूसरे इन्सान को चालाकी और तिकड़म से भरमा कर इतनी मानसिक प्रताड़ना दी जाए कि वो दूसरा इन्सान अपना मानसिक सन्तुलन खोने लगे और अपने आप पर से उसका विश्वास ही उठने लगे। पैट्रिक हैमिल्टन का प्रसिद्ध रहस्य नाटक “गैसलाइट” 1938 में लिखा गया और वो एक ऐसे ही मानसिक ‘मैनिपुलेशन’ की संवेगपूर्ण कथा है जिसने इस परिभाषा को यह नाम प्रदान किया और ‘टु गैसलाइट’ या ‘गैसलाइटिंग’ जैसे शब्द अपने क्रियारूपों में इस नाटक के शीर्षक से ही अंग्रेज़ी भाषा में आये और इसी अर्थ में प्रयोग होने लगे। “अंधेरे रोशनी के” इसी नाटक का हिन्दी रूपान्तर है जो भारतीय परिवेश में इस रहस्य और रोमांच से पूर्ण कथा को प्रस्तुत करता है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |











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