Apne Apne Daav

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Apne Apne Daav

Apne Apne Daav

195.00 148.00

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195.00 148.00

Author: Daya Prakash Sinha

Availability: 5 in stock

Pages: 104

Year: 2025

Binding: Paperback

ISBN: 9788181433149

Language: Hindi

Publisher: Vani Prakashan

Description

अपने अपने दाँव

मैं अपने लिखे नाटकों को सबसे पहले स्वयं ही मंच पर प्रस्तुत करता हूँ। स्वयं निर्देशित करता हूँ, या निर्देशन और प्रस्तुति से सम्बद्ध रहता हूँ। इसके द्वारा मैं नाटक का परीक्षण, विश्लेषण संशोधन, परिवर्धन एक निर्देशक की निगाह से करता हूँ। नाटक के रूप में अपने लिखे शब्दों, संवादों से कितना ही मोह क्यों न हो, निर्देशक के रूप में, मैं उनको निर्ममता से काटता छाँटता हूँ। निर्देशक के रूप में मेरा व्यक्तित्व नाटककार से एकदम अलग होता है। अतएव मैं अपने ही नाटक की मंच क्षमता के बारे में तटस्थ होकर एक अन्य व्यक्ति के समान टिप्पणी कर सकता हूँ। मैं इस नाटक की अनेक प्रस्तुतियों से सम्बद्ध रहा हूँ। दिल्ली और लखनऊ में कई प्रस्तुतियाँ कीं। 1976-79 के बीच में मैंने फीजी में इस नाटक के अनेक प्रदर्शन किये। सब ही प्रस्तुतियों में यह नाटक मंच पर खरा उतरा, दर्शकों को दो घंटे तक गुदगुदाता, और कभी-कभी खुल कर हँसाता रहा। इससे मैं इस नाटक की मंचीयता के प्रति आश्वस्त हूँ।

कभी-कभी मंच प्रस्तुति के पश्चात् मुझे एक दो कुछ ‘ज़्यादा पढ़े’ विद्वान और समीक्षक मिले, जिन्होंने मुझसे पूछा कि यह नाटक कहना क्या चाहता है? इस प्रश्न में यह अन्तर्निहित है कि हर नाटक को कुछ कहना चाहिए। हर नाटक में कोई सन्देश होना चाहिए, या ऐसा कुछ होना चाहिए जिससे कि दर्शक नाटक का सारांश निकाल सकें। या स्पष्ट शब्दों में नाटक में ऐसा कुछ होना चाहिए जिससे ‘सामाजिक परिवर्तन’ लाया जा सके। नहीं तो कुछ भारी भरकम शब्दों का जाल, नये से लगते विचारों का उलझाव, आयातित मानदण्डों पर खरी उतरती ऊलजलूलता (एबसडिटी)-कुछ तो हो। मैं उनसे क्या कहूँ। कुछ ज़्यादा ही ‘पढ़े लिखे’ होने के कारण वह मेरी बात शायद नहीं सुनेंगे। सुनेंगे भी तो न सुनने का नाटक करेंगे। शेक्सपियर का ‘हेमलेट’ क्या कहता है ? कालिदास का ‘शकुन्तला’ नाटक कौन से सामाजिक परिवर्तन का झण्डा ऊँचा करता है? मौलियर के नाटक कौन-सा गुरुगम्भीर विचार प्रतिपादित करते हैं? नाटक की सफल प्रस्तुति जिसमें अभिनेता और दर्शक बराबर की साझेदारी अनुभव करें, क्या नाट्य-उद्देश्य की चरम-प्राप्ति नहीं है ?

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Binding

Paperback

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2025

Pulisher

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