Babarnama

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Author: Yugajit Nawalpuri

Availability: 5 in stock

Pages: 467

Year: 2024

Binding: Paperback

ISBN: 9789387567139

Language: Hindi

Publisher: Sahitya Academy

Description

बाबरनामा

बाबरनामा या तुज़्क-ए-बाबरी मुगल साम्राज्य के पहले सम्राट बाबर की आत्मलिखित जीवनी है। इसमें बाबर ने उज्बेकिस्तान की फगाना वादी में गुज़ारे हुए अपने बचपन और यौवन के दिनों तथा बाद में अफगानिस्तान और भारतीय उपमहाद्वीप पर आक्रमण, कब्ज़ा और अन्य घटनाओं का विवरण दिया है। इस जीवनी में अनेक क्षेत्रों की भूमि, राजनीति, अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक वातावरण, शहरों, इमारतों, फलों, जानवरों इत्यादि का वर्णन किया गया है।

बाबरनामा को मुख्यतः तीन हिस्सों में बाँटा जा सकता है। पहला दौर 1494 में फ्रगाना के राजा बनने से लेकर 1503 तक का है। दूसरा दौर 1504 में काबुल का शासक बनने से लेकर 1525 तक का है। अप्रैल 1526 में दिल्ली का बादशाह बनने के बाद से लेकर सितंबर 1529 तक भारत के पूर्वी हिस्सों में सत्ता का विस्तार आत्मकथा का अंतिम दौर है।

बाबर ने अपनी आत्मकथा मातृभाषा चग़ताई (तुर्की भाषा का पुराना स्वरूप) में लिखी थी। बाद में बाबर के पोते अकबर ने तुज़्क-ए-बाबरी का फ़ारसी भाषा में अब्दुर्रहीम ख़ान-ए-खाना द्वारा हिजरी 998 (1589-90) में अनुवाद कराकर किताब को चित्रों से सजाया। बाबर के स्वरचित संस्मरणों का अंग्रेज़ी अनुवाद जॉन लीडेन और विलियम एर्काइन ने किया था और ये अनुवाद 1826 में प्रकाशित हुए थे, पर यह ग्रंथ बहुत दिनों से अप्राप्य था, ये संस्मरण इसलिए प्रायः अज्ञात ही रहे।

भारत का मध्यकालीन इतिहास मुस्लिम शासन के समरूप है और ब्रिटिशों के आगमन के साथ आधुनिक भारत का इतिहास शुरू होता है, उनके लिए सबसे अच्छा तरीका यही है कि वे अपना अध्ययन बाबर के संस्मरणों से ही शुरू करें।

ये संस्मरण अपनी कहानी स्वयं कहते हैं। विद्वानों ने इन्हें संत अगस्टीन और रूसो की स्वीकारोक्तियों तथा गिबन और न्यूटन के संस्मरणों के समकक्ष स्थान दिया है। एशिया में तो ये अद्वितीय हैं।

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Paperback

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2024

Pulisher

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