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Bertolt Brecht Ki Kahani : Socrates Ka Ghao
₹125.00 ₹110.00



₹125.00 ₹110.00
₹125.00 ₹110.00
Author: Chandrakant Devtale
Pages: 44
Year: 2017
Binding: Paperback
ISBN: 9789352290826
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
बर्ल्टोल्ट ब्रेख्त की कहानी पर आधारित चन्द्रकान्त देवताले द्वारा नाट्य रूपान्तरण ‘सुकरात का घाव’ बहुत ही प्रभावशाली है। रंगमंच पर सफलतापूर्वक मंचस्थ नाटक ‘सुकरात का घाव’ का कला पक्ष भी उतना ही सबल है जितना साहित्य पक्ष। इसका उज्जैन के समर्पित रंगकर्मी धीरेन्द्र परमार के निर्देशन में कई जगह सफल प्रदर्शन हुआ है। ‘दरअसल जान बचाते हुए ज़िन्दा नहीं रहा जा सकता। मैंने कुछ नहीं किया…सिर्फ़ ज़िन्दा रहने और ज़िन्दा रखने की कोशिश के सिवा।’ ‘सत्य के खि़लाफ़ झूठ गुस्ताख़ी करता है, ज़िन्दगी के खि़लाफ़ मौत, शान्ति के खिलाफ़ युद्ध गुस्ताख़ी है, मेरे खि़लाफ़ मौन’ – जैसे संवाद नाटक को और रोचक एवं प्रभावकारी बना देते हैं।
नाटक का कथानक सार्वकालिक है, संवाद प्रभावशाली हैं। यही नाटक की सफलता का रहस्य है।
| Authors | |
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| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2017 |
| Pulisher |
चन्द्रकांत देवताले
जन्म : 7 नवम्बर, 1936; जौलखेड़ा, जिला – बैतूल (मध्यप्रदेश) में। शिक्षा : एम.ए. पी-एच.डी.।
कविता-संग्रह : ‘पहचान’ सीरीज़ में प्रकाशित हड्डियों में छिपा ज्वर (1973); दीवारों पर खून से (1975); लकड़बग्घा हँस रहा है (1980); रोशनी के मैदान की तरफ़ (1982); भूखण्ड तप रहा है (1982); आग हर चीज़ में बताई गई थी (1987); पत्थर की बैंच (1996); इतनी पत्थर रोशनी (2002); उसके सपने (विष्णु खरे-चन्द्रकांत पाटील द्वारा संपादित संचयन, 1997); बदला बेहद महँगा सौदा (नवसाक्षरों के लिए साम्प्रदायिकता विरोधी कविताएँ, 1995); उजाड़ में संग्रहालय (2003)।

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