Bharat Ka Sanskritik Swabhav
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भारत का सांस्कृतिक स्वभाव
सत्य की खोज एक सनातन और अंतहीन यात्रा है और इस यात्रा की साक्षी बनी रही है हमारी भारतीय संस्कृति। यही साक्षी भाव इतिहास की आधार भूमि बना। इतिहास लेखन सत्य का ज्ञान प्राप्त करने के लिए एक पवित्र और शोधपरक कर्म है। देश और विश्व की राजनीतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक प्रकृति किस कालखंड में क्या रही है, यह जानने के लिए हमें इतिहास का अध्ययन करना पड़ता है। दूसरे मानव समूहों के स्वभाव, सभ्यता, शक्ति और कमजोरियों का ज्ञान प्राप्त करने के लिए हम दूसरे देशों का भी इतिहास पढ़ते हैं।
मानव विकास की प्रारंभिक यात्रा से लेकर 21वीं सदी आते-आते इतिहास लेखन के साथ कई तरह के विवाद जुड़ते चले गए। कहीं तिथियों और कालखंड के साथ जानबूझकर की गई भयंकर भूलें, तो कभी तथ्यों के साथ छेड़छाड़। कभी किसी विशेष विचारधारा के प्रभाव में इतिहास लेखन ने अपना दुष्प्रभाव नई पीढ़ियों पर छोड़ा तो कभी किसी अतिवाद ने इतिहास के पन्नों को अपने रंग में रंगा। इतिहास लेखक की दृष्टि यदि किंचित भी राष्ट्र विरोधी है तो वह त्रुटिपूर्ण या आंशिक सत्य ही इतिहास में देता है और हम सब जानते हैं कि खंडित दृष्टिकोण से लिखे गए छिन्न-भिन्न इतिहास का भविष्य की पीढ़ियों पर बुरा प्रभाव कुछ अधिक ही पड़ता है। यदि सत्य के साथ कोई रोचक और राष्ट्र विरोधी काल्पनिक तथ्य जोड़ दिया जाए तो उसे उत्सुकता वश लोग अधिक पढ़ते हैं और उस विचारधारा से दुष्प्रभावित भी अधिकांश हो जाते हैं। इसीलिए किसी भी राष्ट्र के इतिहास लेखक को निष्पक्ष और राष्ट्रनिष्ठ होना पहली शर्त है, अन्यथा वह राष्ट्र के विध्वंस की नींव डाल सकता है अपने इतिहास लेखन के द्वारा। इतिहास लेखन मात्र लेखन की एक विधा नहीं है अपितु अतीत का निर्माण है। यह निर्माण मजबूत और राष्ट्र के हित का होना चाहिए।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |











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