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ब्लैक होल में स्त्री
राजस्थान पुलिस सेवा से पुलिस महानिरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हुए हरिराम मीणा हिन्दी साहित्य में एक महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं। उनका अधिकांश लेखन पुलिस सेवा के अंतर्गत हुए उनके अनुभवों और सच्ची घटनाओं पर आधारित है। जब वे धौलपुर में नियुक्त थे, तो उन्होंने एक लड़की को वेश्या बनानेवाले गिरोह से मुक्त करवाया था। उसी लड़की पर यह मार्मिक उपन्यास आधारित है। हरिराम मीणा कहते हैं, ‘‘कथा की इस समस्त सृजन यात्रा में मुझे ऐसी अनुभूति हुई जैसे मानव यात्रा में आद्यांत, दैहिक शोषण के उत्पीड़न को भोगते हुए स्त्री की पहचान, अस्मिता, गरिमा और मनुष्य के रूप में उसका अस्तित्व घनीभूत अंधकार में विलीन होता रहा हो। उसी अँधेरे में जीते रहने के लिए उसे विवश किया जाता रहा हो। उसका सम्पूर्ण जीवन जैसे एक ब्लैक होल में गुज़रता रहा हो।’’
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher |











अंजू शर्मा –
स्त्री की दुर्दशा पर केंद्रित लोमहर्षक गाथा
राजस्थान पुलिस के महानिरीक्षक पद से सेवा निवृत हुए हरिराम मीणा आदिवासी समाज के प्रतिनिधि विचारक और चिंतक के रूप में ख्यात हैं. मीणा का तीसरा उपन्यास है ‘ब्लैक होल में स्त्री’ इसकी कथावस्तु लेखक के धौलपुर में पुलिस अधिकारी के रूप में अनुभूत एक अनोखी सत्य घटना पर आधारित है, जब उन्होंने एक लड़की को एक वेश्या बनाने वाले गिरोह से मुक्त कराया था. इस लड़की निशा के जीवन में घटित मार्मिक घटनाक्रम को बहुत रोचक अंदाज में उपन्यास की विषय वस्तु बनाते हुए लेखक ने एक अभागी स्त्री के जीवन की अस्मिता, उसकी दुर्दशा और उसके शोषण पर एक लोमहर्षक गाथा रची है. उपन्यास की नायिका निशा की देह ही उसकी शत्रु है, जिसके माध्यम से वह लगातार बहुत ही घृणित और हृदय विदारक घटनाक्रम से गुजरते हुए बार-बार अपने स्त्री होने की कीमत चुकाती है. किताब इस समूचे स्त्री जीवन के इस दुर्भाग्यपूर्ण पक्ष पर सवाल उठाते हुए अपनी बात रखती है कि स्त्री चाहे मृत्युलोक की मनुष्य या फिर स्वर्ग की कोई अप्सरा, उसका शोषण करने वालों के लिए वह केवल और केवल एक देह है, जिसकी इच्छा और सपना कोई मायने नहीं रखते.