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Description
बुल्लेशाह
जैसा कि इतिहास बताता है कि धर्म के पाखण्ड का प्रतिरोध करने वालों को या तो मार दिया जाता है, या उन्हें देश से निर्वासित कर दिया जाता है। यही बुल्लेशाह के साथ भी हुआ। अपनी प्रेम-भावना और लोक-प्रियता के बावजूद उसे भी अन्ततः कसूर से निकाल दिया गया लेकिन वह तो पीर था। उसने भी कसूर की सीमा पर ही अपना अलग हुजरा बना लिया। बुल्लेशाह एक संगीत प्रधान नाटक है। एक ऐसे अभिनेता की ज़रूरत इस नाटक को है कि बुल्लेशाह की भूमिका करने वाला अभिनेता न केवल संगीत का अच्छा जानकार हो, वह अच्छा गाता भी हो। नाटक में न कोई अंक है और न ही दृश्य संख्या दी गयी है। एक दृश्य से दूसरे दृश्य तक का संचरण सहज होता चला जाता है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2022 |
| Pulisher |











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