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Description
चरन दास चोर
नाटक ‘चरन दास चोर’ एक राजस्थानी लोक-कथा पर आधारित है।
इस नाटक में एक ऐसे चोर की कहानी कही गई है जो पुलिस से बचने के लिए एक साधु को गुरु बनाता है। साधु अपने शिष्यों को अपनी बुरी आदतें त्याग देने का संकल्प लेने पर विवश करते हैं। चरन दास से कहा जाता है कि वह चोरी करना छोड़ दे। चरन दास अपने गुरु को यह वचन तो नहीं देता, लेकिन यह प्रण अवश्य करता है कि अब वह जीवन में सदैव सत्य बोलेगा। किस प्रकार वह प्रण को निभाता है, यह बात नाटक पढ़कर या इसे मंच पर देखकर ही जानी जा सकती है।
इस नाटक के देश-विदेश में अनेक सफल प्रदर्शन हो चुके हैं। सर्वत्र इसकी अत्यधिक सराहना हुई है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2020 |
| Pulisher |











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