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Dravida Rajneeti : Periyar Se Jayalalithaa Tak
₹350.00 ₹260.00



₹350.00 ₹260.00
₹350.00 ₹260.00
Author: Praveen Kumar Jha
Pages: 224
Year: 2026
Binding: Paperback
ISBN: 9789347265099
Language: Hindi
Publisher: Radhakrishna Prakashan
द्रविड़ राजनीति : पेरियार से जयललिता तक
दुनिया में ऐसा जन-समूह शायद ही कोई हो जिसकी आनुवंशिकी मिश्रित न हो। भारत में ही ख़ानाबदोश समाज से लेकर अनेक तरह के सैन्य और व्यापारिक आवागमन होते रहे जिनसे रक्त और भाषा दोनों का मिश्रण हुआ। देखें तो ये विषय विज्ञान के हैं लेकिन तमाम आर्थिक और सामाजिक कारणों से राजनीति का विषय हो जाते हैं। मिसाल के तौर पर उन्नीसवीं सदी में आर्य और द्रविड़ नस्लों का विभाजन जो आज़ादी के बाद आज तक कभी भाषा और कभी संस्कृति के विवादों में सामने आ जाता है।
द्रविड़ राजनीति को आरम्भ से लेकर लगभग वर्तमान तक देखती-समझती यह पुस्तक इसी नस्ली विभाजन से अपनी बात शुरू करती है और थियोसोफ़िकल सोसायटी की स्थापना को इसका पूर्व-बिन्दु मानते हुए, कांग्रेस के गठन, दक्षिण में गांधी जी के हिन्दी प्रचार की शुरुआत और उसी दौरान पेरियार के रूप में एक ब्राह्मण-विरोधी व्यक्तित्व के उदय को द्रविड़ आन्दोलन की पहली निर्णायक घटना मानती है।
उसके बाद दक्षिण बनाम उत्तर का समीकरण सामने आया। जब कांग्रेस ‘अंग्रेजो, भारत छोड़ो’ कह रही थी तब पेरियार ने ‘आर्यो, बाहर जाओ’ का नारा दिया और 1946 में ‘द्रविड़ कड़गम’ का झंडा तैयार हुआ। फिर अन्नादुरइ ने पेरियार से अलग अपने दल द्रविड़ मुनेत्र कड़गम की घोषणा की।
स्वतंत्रता पूर्व इतिहास की इन पेचीदा गलियों से होती हुई द्रविड़ राजनीति की यह समीक्षा, एम.जी.आर., करुणानिधि, जयललिता, तमिल ईलम, राजीव गांधी की हत्या से होते हुए उत्तर और दक्षिण के ध्रुवीकरण की पड़ताल भी उसी गहराई से करती है और कोशिश करती है कि यह विरोध न रहे, भाषाओं का द्वन्द्व न हो, श्रेष्ठ और हीन का झगड़ा न हो।
इतिहास और राजनीति पर केन्द्रित होते हुए भी इस किताब ‘द्रविड़ राजनीति : पेरियार से जयललिता तक’ की विशेषता ये है कि यह अत्यन्त तथ्य-संकुल पाठ को भी एकदम बोलचाल की भाषा और संवादधर्मी शैली में पाठक के सामने रखती है, ताकि वह इस मसले पर अपने निजी विषय की तरह सोच सके।
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |
प्रवीण कुमार झा
प्रवीण कुमार झा कथेतर रुचि के लेखक हैं। उनके बहुमुखी लेख भारतीय अखवारों- पत्रिकाओं-हिन्दुस्तान प्रभात ख़बर, द कैपिटल पोस्ट, प्रजातन्त्र, ‘सदानीरा और मुख्य मीडिया पोर्टलों पर प्रकाशित होते रहे हैं। इसके अतिरिक्त उन्होंने एक सामाजिक व्यंग्य-संग्रह ‘चमनलाल की डायरी’, और दो यात्रा संस्मरण-आइसलैण्ड और नीदरलैण्ड पर भी लिखे। प्रवीण का जन्म बिहार में हुआ, और वह भारत के भिन्न-भिन्न शहरों से गुज़रते अमरीका और यूरोप महादेश में रहे। वह निवर्तमान नॉर्वे (यूरोप) में विशेषज्ञ चिकित्सक हैं।

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