

Dukhon Ke Shahar Ka Gulmohar

Dukhon Ke Shahar Ka Gulmohar
₹299.00 ₹229.00
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Author: Amita Neerav
Pages: 206
Year: 2025
Binding: Paperback
ISBN: 9789362018090
Language: Hindi
Publisher: Setu Prakashan
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Description
दुखों के शहर का गुलमोहर
अमिता नीरव की कहानियाँ जिन्दगी की जद्दोजहद और समाज के विद्रूप से हमें रूबरू कराती हैं। उनके इस कहानी संग्रह ‘दुखों के शहर का गुलमोहर’ में उनकी ग्यारह कहानियाँ संकलित हैं। ये सभी कहानियाँ जिन्दगी की दुश्वारियों से जूझते पात्रों के इर्द-गिर्द घूमती हैं। इन कहानियों के किरदार और कथानक भले अलग हों मगर समवेत रूप से देखें तो इनसे समकालीन भारतीय समाज की बाबत एक व्यापक यथार्थ बोध उभरता है। मसलन, ‘275 रुपये’ कहानी में गरीबी से पिसते एक परिवार के संघर्ष का चित्रण है जिसमें हम देखते हैं कि तंगहाली से लगातार लड़ते परिवार का मुखिया किस तरह हीनता-ग्रन्थि समेत तरह-तरह की कुण्ठा का शिकार होता है। ‘चन्दा की डिजाइनर साड़ी’ कहानी शराबी पति द्वारा प्रताड़ित होती एक स्त्री के दुखों की दास्तान है तो ‘कॉफी मग’ कहानी कर्ज के बोझ से दबे एक किसान की दुर्दशा बयान करती है। ‘दुखों के शहर का गुलमोहर’ कहानी दाम्पत्य जीवन में आयी दरार और फलस्वरूप पत्नी के सताये जाने की पीड़ा का वर्णन करती है तो ‘आने वाली नस्लों की खातिर’ एक मुस्लिम परिवार की व्यथा-कथा कहती है। ‘अन्त से पहले’ कहानी में कोरोना काल की भयावहता का चित्रण है तो ‘क्षितिज के उस पार का आसमान’ कहानी फिल्मी दुनिया की हकीकत दिखाती है, बताती है कि यह रुपहला संसार उतना रुपहला नहीं है जितना हम मान बैठे हैं, वहाँ का जीवन भी संघर्षों से भरा है। इन उदाहरणों से जाहिर है कि थीम से लेकर अनुभव और दृश्यालेख तक, कथाकार अमिता नीरव के यहाँ कोई दोहराव नहीं है। यह उनकी एक विरल विशिष्टता है और उनकी कहानियों के टटकेपन का सबब। उनका अनुभव-वितान विस्तृत है और उनकी भाषा में वह सामर्थ्य है जो बहुरंगी और बहुस्तरीय यथार्थ को अन्तर्भुक्त करने के लिए एक जरूरी शर्त है।
Additional information
| ISBN | |
|---|---|
| Authors | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Binding | Paperback |
| Pulisher |









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