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Description
दुनिया मेरे आगे
राजेंद्र यादव की बहुचर्चित लोकतांत्रिकता भर का मामला होता तो शायद उनके व्यक्तित्व में वह चुंबक नहीं होता जिसकी वजह से लोग उनकी ओर खिंचते चले जाते थे। हमारे बीच ऐसे बहुत सारे लोग होते हैं जो बिल्कुल दिल खोल कर मिलते हैं और यारबाश कहे जा सकते हैं। लेकिन राजेंद्र यादव की शख़्सियत में जो बौद्धिक चौकन्नापन था, जो उदात्त नफ़ासत थी-वह बाकी जगह दुर्लभ थी। वे अपनी उपस्थिति का कोई दबाव बनाये बिना अपना आभामंडल बनाये रखते थे। शायद यही वजह थी कि जिस भी महफ़िल में वे होते, महफ़िल के सिरमौर होते। वे पुरानी किताबों की चर्चा करते, नयी घटनाओं पर बहस करते, जो लिखा या पढ़ा जा रहा है, उसपर उनकी बारीक नज़र होती, और अक्सर वे अपने काम की चीज़ निकाल लेते।
– इसी पुस्तक से
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2021 |
| Pulisher |











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