Description
एक पत्नी के नोट्स
‘एक पत्नी के नोट्स’ दाम्पत्य की विरूपता की मर्मान्तक कथा है। पति-पत्नी का एक रिश्ता जो सरल प्रेमपगी काव्य पंक्तियों की तरह शुरू हुआ, दाम्पत्य में बदलते ही जैसे नागफनी हो गया। संदीप जो एक सम्पूर्ण और सुरुचिपूर्ण पुरुष के रूप में कविता को मिला, पति बनते ही एक विकृत, क्रुकंड व्यक्ति में बदल गया।
यह उपन्यास विवाह नामक संस्था के उन पक्षों को दिखाता है जहाँ स्त्री एक असहाय-निरुपाय इकाई और पुरुष, अगर वह संदीप की तरह अपने जीवन में सफल और उच्च पदासीन हो तो केवल एक अधिकारवादी विकृत पति।
सबके सामने आदर्श दम्पती के रूप में प्रशंसित संदीप और कविता की यह कहानी स्त्री-पुरुष सम्बन्ध को सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक स्तर पर लाकर देखती है। साहित्य का व्यापक और गहन अध्ययन भी संदीप को उस मानसिक हिंसा से नहीं रोक पाता, जिसे वह रोज़ अपनी पत्नी के ऊपर आजमाता है, कभी सन्देह से, कभी सीधे अपमान से वह अकसर उसे प्रताड़ित करता है।
साथ ही इतना पजेसिव भी कि कविता की कोई तारीफ़ भी कर दे तो भभक उठे। कविता समझ ही नहीं पाती, कि वह कितनी सुखी है, कितनी दुखी।
दूर से साधारण दिखनेवाले हम लोगों के भीतर कैसे-कैसे विद्रूप छिपे होते हैं और अगर एक संस्था का आवरण मिल जाए तो किस-किस तरह के प्रकट होते हैं, यह भी इस उपन्यास को पढ़ते हुए बराबर महसूस होता है।
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