Ghat Rahi Hai Roj Meri Chehargi

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Ghat Rahi Hai Roj Meri Chehargi

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295.00 220.00

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Author: Chandrashekhar Verma

Availability: 5 in stock

Pages: 128

Year: 2025

Binding: Paperback

ISBN: 9789372349870

Language: Hindi

Publisher: Vani Prakashan

Description

घट रही है रोज़ मेरी चेहरगी

घटती हुई चेहरगी बढ़ती हुई उम्र का बयान न होकर ज़िन्दगी में बढ़ती हुई ज़ेहनियत, तजरबे और परिपक्वता की निशानी है। चन्द्रशेखर वर्मा की ग़ज़लें बताती हैं कि चेहरगी का घटना कोई नकारात्मक एहसास न होकर ज़िन्दगी का वह ख़ूबसूरत मोड़ है जहाँ इंसान का दिल और दिमाग़ दोनों गहरे, ज़्यादा सच्चे और ज़्यादा ख़ूबसूरत हो जाते हैं।
ज़िन्दगी के हर सफ़र में हम बहुत खोते हैं अपनी मंज़िल को पाने के लिए, यह किताब उसी सफ़र की तर्जुमानी है— चेहरे को खो कर अपनी रूह को पाने की कहानी है। बाहर से घटते हुए भी भीतर से बढ़ते जाने की दास्तान है।

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Authors

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Paperback

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2025

Pulisher

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