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Hindi Upanyas : Ek Antaryatra
₹250.00 ₹220.00



₹250.00 ₹220.00
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Author: Ramdarash Mishra
Pages: 279
Year: 2022
Binding: Text
ISBN: 9788126722037
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
हिन्दी उपन्यास : एक अन्तर्यात्रा
हिन्दी उपन्यास अभी अपनी यात्रा के सौ वर्ष भी पूर्ण नहीं कर सका है, किन्तु इतने ही दिनों में वह जीवन यथार्थ के इतने मोड़ों और विषम धरातलों से गुजरा है कि उसे ‘आधुनिक जीवन का आईना’ कहा जा सकता है। प्रस्तुत पुस्तक उपन्यास-यात्रा की एक अन्तर्यात्रा है। यह बहुत-सी छोटी-मोटी पुस्तकों की तरह धरातल पर दिखाई पड़ने वाली घटनाओं, श्रेणीबद्ध चरित्र-चित्रणों, संस्थागत विचारों और रूढ़ शिल्प-चर्चाओं के ब्योरे में नहीं भटकी है, यह तो यात्रा की भीतरी चेतनाओं, सामाजिक और मानसिक सत्यों के सन्दर्भों में उभरते विविध मोड़ों और गतियों को पकड़ने के प्रयत्न में रही है। इसीलिए इसमें उपन्यास की गतियों, मोड़ों और चेतनाओं तथा उन्हें निर्मित या प्रभावित करनेवाली परिस्थितियों का निरीक्षण तो किया ही गया है, साथ-ही-साथ विशिष्ट कृतियों की निजी सौन्दर्य-चेतना को भी संश्लिष्ट रूप में रखने का प्रयास है।
निजी सौन्दर्य-चेतना के अभाव में कृतियाँ कृतियाँ न रहकर सामाजिक या मनोवैज्ञानिक सत्यों का दस्तावेज बन जाती हैं। प्रस्तुत पुस्तक में इसलिए बहुत से ऐसे चर्चित मोटे-मोटे उपन्यास नहीं लिए गए हैं जो सौन्दर्य-चेतना के अभाव में विशिष्ट सृजन नहीं बन सके हैं। सीमित आकार के नाते भी प्रस्तुत पुस्तक में ऐसे अनेक उपन्यासों को छोड़ना पड़ा है जिनकी चर्चा की जा सकती तो अच्छा रहता, किन्तु किसी धारा में प्रमुख योगदान न दे सकने या निजी तौर पर विशिष्टतर उपलब्धि न प्राप्त कर सकने के कारण जिनका अचर्चित रह जाना विशेष महत्त्व नहीं रखता। लेखक की अन्तर्दृष्टि हिन्दी उपन्यास के संश्लिष्ट व्यक्तित्व और उसकी चेतना-यात्रा को पहचानने में सफल हुई है। यह पुस्तक अपने सीमित आकार में भी समग्र और प्रभावशाली है।
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Text |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2022 |
| Pulisher |
रामदरश मिश्र
जन्म : 15 अगस्त, 1924 को गोरखपुर (उ० प्र०) जिले के डुमरी गांव में।
शिक्षा : एम०ए०, पी-एच०डी०
सर्जनात्पक रचनाएँ : ‘पथ के गीत’, ‘बैरंग-बेनाम चिट्ठियाँ’, ‘पक गई है धूप’, ‘कंधे पर सूरज’, ‘दिन एक नदी बन गया’, ‘मेरे प्रिय गीत’, ‘जुलूस कहाँ जा रहा है ?’, ‘रामदरश मिश्र की प्रतिनिधि कविताएँ’, ‘आग कुछ नहीं बोलती’, ‘शब्द सेतु’, ‘बारिश में भीगते बच्चे’, ‘ऐसे में जब कभी’, ‘आम के पत्ते (काव्य-संग्रह), ‘हंसी ओठ पर आँखें नम हैं’, ‘बाजार को निकले हैं लोग’ (ग़ज़ल-संग्रह) ‘पानी के प्राचीर’, ‘जल टूटता हुआ’, ‘बीच का समय’, ‘सूखता हुआ तालाब’, ‘अपने लोग’, ‘रात का सफर’, ‘आकाश की छत’, ‘आदिम राग’ (बीच का समय), ‘बिना दरवाजे का

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