Jainendra Kumar

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Jainendra Kumar

Jainendra Kumar

100.00 90.00

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Author: Govind Mishra

Availability: 5 in stock

Pages: 88

Year: 2024

Binding: Paperback

ISBN: 9788126015795

Language: Hindi

Publisher: Sahitya Academy

Description

जैनेन्द्र कुमार

जैनेन्द्र कुमार (जन्म : 2 जनवरी 1905, अलीगढ़; निधन : 24 दिसम्बर 1988) हिंदी के विशिष्ट कथाकार, निबंधकार और विचारक थे। वे अपनी उच्च शिक्षा छोड़कर असहयोग आंदोलन में शामिल हुए और कई बार जेल गए। प्रेमचंद के बाद हिंदी के सबसे बड़े कथाकार के रूप में विख्यात जैनेन्द्र कुमार मनोजगत के यथार्थ का चित्रण करने वाले साहित्यकार हैं। उन्होंने कथ्य, शिल्प, उद्देश्य आदि की दृष्टि से प्रेमचंद से सर्वथा भिन्न पथ अपनाकर जिस जोखिम को उठाने का अपूर्व साहस दिखाया, वह श्लाघ्य है। प्रेमचंद ने हिंदी साहित्य को कल्पना और मनोरंजन लोक से निकालकर यथार्थ की जमीन पर खड़ा किया तो जैनेन्द्र कुमार ने उसे मनुष्य की भीतरी दुनिया में ले जाकर प्रौढ़ता प्रदान की। यही नहीं, हिंदी उपन्यास में आधुनिकता के स्वीकार का श्रेय जैनेन्द्र कुमार को प्राप्त है। उन्होंने सर्वप्रथम नारी को सामंती दृष्टि से न देखकर आधुनिक दृष्टिकोण से देखा तथा नारी संबंधी प्रचलित मान्यताओं को निर्जीव और अप्रासंगिक मानकर उनकी उपेक्षा की।

जैनेन्द्र कुमार की कृतियों के आधार पर आलोचकों ने उनकी आलोचना तरह-तरह से की है। कोई उन्हें सेक्सवादी मानता है तो कोई फ्रायड और युंग से प्रभावित मनोविश्लेषणवादी। गांधीवादी तो उन्हें माना ही जाता है। चूँकि वे जैन थे, इसलिए जैन चिंतन का उन पर स्वाभाविक प्रभाव रहा। जैनेन्द्र कुमार का चिंतक रूप उनके संपूर्ण साहित्य से प्रतिफलित होता है, जिसके पीछे एक सुस्पष्ट समाज-दर्शन है। उनके विचार, कल्पनाशीलता और आदर्श में गांधी, टॉलस्टॉय तथा भारतीय चिंतन परंपरा की गहरी छाप मिलती है।

जैनेन्द्र कुमार की पचास से भी अधिक कृतियों में 13 उपन्यास, 18 कहानी-संग्रह और इतनी ही वैचारिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। उनकी प्रसिद्ध कृतियों में परख (1929), सुनीता (1935), त्यागपत्र (1937) और कल्याणी (1938) शीर्षक उपन्यास तथा खेल, नीलम देश की राजकन्या, पत्नी, एक रात और फाँसी जैसी कहानियाँ उल्लेख्य हैं। जैनेन्द्र की रचनाओं के अनुवाद विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित हुए हैं। साहित्य अकादेमी की महत्तर सदस्यता से विभूषित जैनेन्द्र कुमार को हिंदुस्तानी एकेडेमी अवार्ड, साहित्य अकादेमी पुरस्कार, शलाका सम्मान, भारत भारती पुरस्कार सहित अनेक सम्मान और पुरस्कार प्राप्त हुए थे। वे यूनेस्को सहित अनेक संस्थाओं से निरंतर संबद्ध रहे थे।

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Paperback

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Hindi

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Publishing Year

2024

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