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Description
जलियाँवाला बाग : 13 अप्रैल 1919
भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दो नेताओं-सत्यपाल और सैफुद्दीन किचलू की गिरफ्तारी के खिलाफ अहिंसक विरोध हेतु पंजाब के सबसे लोकप्रिय त्यौहार बैशाखी पर 13 अप्रैल, 1919 को अमृतसर में जलियाँवाला बाग के सार्वजनिक मैदान में एकत्र लोगों पर जनरल डॉयर द्वारा निर्मम गोली चलवाना, भारत की आजादी की लड़ाई का एक दुर्भाग्यपूर्ण, लेकिन निर्णायक हादसा रहा है। आंदोलनकारियों को रोकने के लिए कर्फ्यू लगाया गया था, लेकिन जब आम लोगों ने इस निषेध को न मानते हुए जलियाँवाला बाग में सभा करने का निश्चय किया तो ब्रितानी फौज ने 10 मिनट तक लगातार गोलियाँ चलाईं। लोगों के बाहर निकलने के रास्ते पर गोलियाँ बरस रही थीं। कई लोग जान बचाने को कुएँ में कूद गए। इस घटना ने पूरी दुनिया को स्तब्ध कर दिया था। इस कार्यवाही के बाद लोगों का अंग्रेजी हुकूमत की नीयत पर से भरोसा उठ गया जो उन लोगों को 1920-1922 के असहयोग आंदोलन की ओर ले गया।
यह पुस्तक जलियाँवाला बाग कांड के पहले भारत में अंग्रेज सरकार व स्वतंत्रता आंदोलन की स्थिति और इस नृशंस कांड के व्यापक प्रभाव का आकलन है। इस पुस्तक में पहली बार जलियाँवाला बाग में शहीद हुए 492 लोगों की सूची दी जा रही है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2021 |
| Pulisher |











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