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Description
जम्मू कश्मीर : एकात्मता के पथ पर
जम्मू कश्मीर की भूमि भारतीय संस्कृति का पालना रही है। उत्तर हो या दक्षिण, पूर्व हो या पश्चिम, अथवा सुदूर पूर्व का क्षेत्र, जो आज अनेक संप्रभु देशों के रूप में पहचाना जाता है, सांस्कृतिक रूप से समान मूल्यों तथा मौलिक चिंतन को धारण करता है। इनके बीच स्थापित एकात्मता को सिंधु-सरस्वती तट पर साधनारत ऋषियों ने पहचाना और उसे पुष्ट करने के प्रयत्न किए। यह भारत की एकात्म दृष्टि है जिसने शक, हूण और कुषाण आक्रमणकारियों को अपने में समाहित कर लिया।
आक्रमण और प्रतिरोध की साक्षी शताब्दियाँ अविच्छिन्न एकात्मता की भी साक्षी रही हैं। नकारात्मकता से भरे इन दशकों में आशा की किरण थी जम्मू कश्मीर के निवासियों के मन में भारत के साथ एकात्मता और अपनत्व का भाव, जिसे महात्मा गाँधी ने पहचाना, सरदार पटेल ने पहचाना, डॉ. अंबेडकर और डॉ. मुखर्जी ने पहचाना। एकात्मता की यही ज्योति हजारों-लाखों भारतीयों के मनों में जलती रही जिसका प्रकाश आज जम्मू कश्मीर में जाने वाला हर व्यक्ति अनुभव कर सकता है। जम्मू कश्मीर पर केंद्रित एक बेजोड़ पुस्तक।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| ISBN | |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |











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