JP Se BJP : Sau Saal Ke Aaine Mein Bihar
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जेपी से बीजेपी : सौ साल के आईने में बिहार
आज के भारत की कहानी को समझने के लिए बिहार की यात्रा करना और उसे महसूस करना बेहद जरूरी है-यह एक तरह की तीर्थ यात्रा है, जो आपको ययार्थ से रूबरू करवाती है। यह पुस्तक उस जटिल यात्रा को समझने का कंपास भी है।
– राज कमल झा
(मुख्य सम्पादक- द इंडियन एक्सप्रेस)
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जेपी से बीजेपी : सौ साल के आईने में बिहार पुस्तक में बिहार की राजनीति का सिंहावलोकन भी है और 1952 चुनाव से लेकर 2025 के चुनाव का आकलन भी है। इस कहानी में बिहार की राजनीति के धुरंधर, नीतीश कुमार और लालू प्रसाद तो हैं ही, भविष्य की राजनीति के दावेदारों की भी चर्चा है। यह त्रिवेणी संघ से तेजस्वी तक की यात्रा है, डॉ. श्रीकृष्ण सिंह से लेकर कन्हैया कुमार तक का विवरण है। समाजवादी पुरोधा रामनन्दन मिश्र, जगदेव प्रसाद, कर्पूरी ठाकुर, रामानन्द तिवारी और कपिलदेव सिंह से गुज़रते हुए कांग्रेस की पूरी यात्रा भी है, उसकी थकान की दास्तां भी है, राहुल गांधी के पार्टी पुनर्जागरण का प्रयास भी है। समाजवादी नेता जयप्रकाश नारायण तो किताब के केन्द्र में हैं। समाजवाद से राष्ट्रवाद की यात्रा में जितने पड़ाव हैं, यह किताब सभी पड़ावों से गुजरती हैं। कैसे रामविलास पासवान तीन बार मुख्यमन्त्री बनने से चूक गये, लालू प्रसाद ने कैसे सत्ता पायी, शरद यादव बिहार कैसे आये और चारा घोटाले की अनकही कहानी क्या है? चिराग पासवान, सम्राट चौधरी और नीतीश कुमार के पुत्र प्रशान्त कुमार की क्या कहानी है? चुनावी रणनीतिकार प्रशान्त किशोर के नेता बनने की कैसी यात्रा है और क्यों बीजेपी अभी भी समाजवाद के आखिरी स्तम्भ नीतीश कुमार को डिकोड नहीं कर पा रही है ? – इन सब जटिल विमर्शो पर किताब में बात की गयी है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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