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Kamdev ka Apna Basant Ritu ka Sapna
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Author: Habib Tanvir
Pages: 64
Year: 2018
Binding: Paperback
ISBN: 9789352291403
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
कामदेव का अपना वसंत ऋतु का सपना
एथेंस का ड्यूक थिसियस अमेज़नों की रानी हिपोलाइटा से विवाह की तैयारियाँ कर रहा है। विवाहोत्सव की उसकी योजनाएँ गँवई कारीगरों के एक दल को अपने ही द्वारा विरचित एक त्रासदी का मंचन करने को उकसाता है जिसका पूर्वाभ्यास वे पास के एक वन में करने का निश्चय करते हैं। उसी समय एक प्रेमी युगल हर्मिया और लाइसेंडर उसी वन में छिप जाते हैं क्योंकि हर्मिया का पिता चाहता है कि बेटी का विवाह डेमेट्रियस नामक दूसरे नवयुवक से हो। प्रेमी युगल ग़लती से अपनी योजनाएँ हेलेना को बता देते हैं जो डेमेट्रियस को चाहती है। ड्यूक के विवाह के उपलक्ष्य में वन आई हुई परियों से भरा हुआ है। उनके राजा ओबरॉन की अपनी रानी टाइटानिया से खटपट हो गई है। पक नामक एक गण को एक ऐसा फूल खोजने वन में भेजता है जिसका रस यदि किसी सोते हुए व्यक्ति की पलकों में निचोड़ दिया जाए तो वह जागने के बाद जिस पहले जीव को देखेगा उसी के प्रेम में पड़ जाएगा। ओबरॉन की कारस्तानियाँ और पक द्वारा जान-बूझकर की गई गलतियाँ प्रेमियों को कई ग़लतफ़मियों में डाल देती हैं जो तभी सुलझती हैं जब ओबरॉन टाइटानिया को उसका असली रूप लौटा देता है। अब चारों प्रेमियों को अपना सही साथी मिल जाता है और ड्यूक थिसियस उन्हें अपने साथ तिहरे विवाहोत्सव में सम्मिलित होने के लिए एथेंस लौटने के लिए निमंत्रित करता है जिसमें गँवई कारीगरों की रंगमंडली एक लोटपोट कर देनेवाला मंचन प्रस्तुत वरती है।
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2018 |
| Pulisher |
हबीब तनवीर
नाटककार, निर्देशक, प्रोड्यूसर, अभिनेता, पत्रकार, संपादक, कवि और ‘नया थिएटर’ के संस्थापक।
1 सितंबर, 1923 को रायपुर, मध्यप्रदेश में जन्मे।
हबीब तनवीर की शिक्षा मौरिस कॉलेज, नागपुर में हुई।
1954 में यूनाइटेड किंगडम गए और वहाँ विभिन्न संस्थानों से थिएटर का प्रशिक्षण प्राप्त किया। 1959 में ‘नया थिएटर’ की स्थापना।
प्रमुख नाटक : शतरंज के मोहरे, आगरा बाज़ार, मिट्टी की गाड़ी, मिर्जा शोहरत बेग़, लाला शोहरत राय, बहादुर क्लारिन, शाजापुर की शांतिबाई, देख रहे हैं नयन, मुद्राराक्षस, कामदेव का अपना वसंत ऋतु का सपना, सड़क, हिरमा की अमर कहानी और चरनदास चोर (जिसके 1000 से अधिक प्रदर्शन हो चुके हैं)।

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