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Keral Ke Hindi Sahitya Ka Itihas
₹225.00 ₹200.00



₹225.00 ₹200.00
₹225.00 ₹200.00
Author: P. Lata
Pages: 340
Year: 2016
Binding: Text
ISBN: 9789352211029
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
केरल के हिन्दी साहित्य का इतिहास
केरल का प्रथम हिन्दी रचनाकार महाराजा स्वाति तिरुनाल राम वर्मा को माना जाता है जिनका जन्म तिरुवितांकूर के राजा मार्तंड वर्मा के राजवंश में सन् 1813 में हुआ था। उनकी रचनाएँ मध्यकालीन हिन्दी कवियों की तरह भक्ति-प्रधान गीत थे जिनका संकलन बाद में आकर किया गया। इसके बाद लगातार इस अहिन्दीभाषी राज्य में हिन्दी में मौलिक लेखन करनेवाले रचनाकार सक्रिय रहे हैं, न सिर्फ़ कविता में बल्कि कहानी, उपन्यास, निबन्ध व अन्यान्य विधाओं में भी।
केरल की रचनाकार और विद्वान पी. लता ने अपनी इस पुस्तक में केरल की समूची हिन्दी रचनात्मकता का सर्वांगीण इतिहास प्रस्तुत किया है। साथ ही वे उस विचार-यात्रा को भी रेखांकित करती चली हैं जो केरलीय हिन्दी लेखकों, कवियों की रचनाओं के सरोकारों की प्रेरणा-शक्ति और पृष्ठभूमि रही।
मौलिक साहित्य के साथ लेखक ने इसमें अनूदित साहित्य का भी क्रमबद्ध विवरण दिया है और साथ ही व्याकरण तथा कोश आदि विषयों पर हुए लेखन को भी समाहित किया है। प्रकाशित पुस्तकों के अलावा उन्होंने पत्र-पत्रिकाओं में छपी रचनाओं और साहित्य की भूमिका लेखन तथा सम्पादकीय लेखन जैसी शाखाओं को भी अपने विश्लेषण का आधार बनाया है और केरलीय हिन्दी साहित्य के इतिहास में उनकी अवस्थिति को दर्ज किया है।
डॉ. पी. लता के प्रशंसनीय उद्यम से सम्भव हुई यह पुस्तक न सिर्फ़ छात्रों के लिए बल्कि उन हिन्दी प्रेमियों के लिए भी अनिवार्यतः पठनीय है जो हिन्दी चेतना के अखिल भारतीय विस्तार की संरचना तथा व्याप्ति को जानना चाहते हैं।
| Authors | |
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| Binding | Text |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2016 |
| Pulisher |
पी. लता
शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी), एम.ए. (मलयालम), एम.फ़िल (हिन्दी), पीएच.डी. (हिन्दी) ।
पूर्व प्रोफ़ेसर और अध्यक्षा, हिन्दी विभाग, सरकारी महिला महाविद्यालय, तिरुवनन्तपुरम ।
विविध हिन्दी पत्रिकाओं में शोध लेख, कहानियाँ (मौलिक और अनूदित), कविताएँ (मौलिक और अनूदित) प्रकाशित।
केरल के प्रथम हिन्दी पत्रकार जी. नील्कथान नायर की अप्रकाशित आत्मकथा ‘यान जी.एन.’ (मलयालम) का हिन्दी अनुवाद ‘मैं जी.एन.’ नाम से ‘सग्रथान’ पत्रिका में धारावाहिक प्रकाशित।
प्रकाशित प्रमुख कृतियाँ : ‘प्रयोजनमूलक हिन्दी’, ‘हिन्दी भाषा के विविध रूप’, ‘केरल की हिन्दी पत्रकारिता का इतिहास’, ‘व्यावहारिक अनुवाद’ (सहलेखन), ‘नव-संकलन’ (सहलेखन), ‘अभिनव संकलन’ (सहलेखन), ‘हिन्दी-मलयालम तुलनात्मक अध्ययन’ (सहलेखन)।

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