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Description
खाद्य संकट की चुनौती
पैसा, पॉवर और सेक्स की असाधारण भूख के इस दौर में दुनिया की एक अरब से ज्यादा आबादी भूखे पेट सोती है। यह हमारे दौर की बड़ी विडम्बना है। बल्कि इसे दुनिया का नया आश्चर्य कहें तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। पर यह विडम्बना कोई संयोग नहीं है। यह उत्पन्न इसीलिए हुई क्योंकि कुछ लोगों की गैरजरूरी भूख बढ़ गयी है और उन्होंने जरूरी भूख पर ध्यान देना छोड़ दिया है। इस क्रूर खाद्य प्रणाली ने अमीरों को भी तरह-तरह की बीमारियाँ दी हैं और धरती के पर्यावरण को भारी क्षति पहुँचायी है। यह क्षति बढ़ती गयी तो धरती सबका पेट भर पाने से इनकार भी कर सकती है। खाद्य संकट की यह चुनौती हमें नये विकल्पों की तलाश के लिए ललकारती है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2009 |
| Pulisher |











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