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Koormanchali Ki Kavitayein
₹250.00 ₹188.00



₹250.00 ₹188.00
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Author: Manohar Shyam Joshi
Pages: 122
Year: 2013
Binding: Hardbound
ISBN: 9789350724286
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
कूर्मांचली की कविताएँ
आओ सुनें चुपचाप चिड़िया का गान ! ‘‘काफल पाको त्वील नी चाखो’’ की मधुर तान ! सुनें उसे बस और कुछ न सुनें, कुछ न करें, बस सुनें सुनें, सुनते रहें चुपचाप ! न गिनें कि जंगल में देवदारु कितने हैं ? कितने बाँज ? चीड़ कितने हैं ? न सुनें वायु का रुदन झरनों की छल छल कल कल पत्तों की सर सर खर खर झींगुरों की झिंग झनन झनन ! कुछ न करें बस लेटे रहें पास पास घास पर सुनते रहें चिड़िया का गान ‘‘काफल पाको त्वील नी चाखो’’ की मधुर तान जब तक अनायास ही हमारे होंठों से प्यास किसी पिछले जीवन की न फूट पड़े बन ‘‘काफल पाको मील नी चाखो’’ की मधुर तान !
| Authors | |
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| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2013 |
| Pulisher |
मनोहर श्याम जोशी
जन्म : 9 अगस्त, 1933 को अजमेर में।
लखनऊ विश्वविद्यालय के विज्ञान स्नातक मनोहर श्याम जोशी ‘कल के वैज्ञानिक’ की उपाधि पाने के बावजूश्द रोजी-रोटी की खातिर छात्र जीवन से ही लेखक और पत्रकार बन गए। अमृतलाल नागर और अज्ञेय – इन दो आचार्यों का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त हुआ। स्कूल मास्टरी, क्लर्की और बेरोजगारी के अनुभव बटोरने के बाद 21 वर्ष की उम्र से वह पूरी तरह मसिजीवी बन गए।
प्रेस, रेडियो, टी.वी. वृत्तचित्र, फिल्म, विज्ञापन-सम्प्रेषण का ऐसा कोई माध्यम नहीं जिसके लिए उन्होंने सफलतापूर्वक लेखन-कार्य न किया हो। खेल-कूद से लेकर दर्शनशास्त्र तक ऐसा कोई विषय नहीं जिस पर उन्होंने कलम न उठाई हो।

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