Krishna Agnihotri Sampurna Sahitya Ka Mulyankan

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Krishna Agnihotri Sampurna Sahitya Ka Mulyankan

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695.00 595.00

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Author: Dr. Nihar Geete

Availability: 5 in stock

Pages: 336

Year: 2015

Binding: Hardbound

ISBN: 9789385389313

Language: Hindi

Publisher: Aman Prakashan

Description

कृष्णा अग्निहोत्री सम्पूर्ण  साहित्य का मूल्यांकन

जीवन के झंझावतों एवं संघर्षों से तपकर निकला है वरिष्ठ लेखिका कृष्णा अग्निहोत्री का लेखन। वे अत्यन्त जुझारू व प्रचलित पुरुष निर्मित परम्पराओं और रूढ़ियों की भंजक रही हैं। उम्र के नवें दशक में प्रवेश कर वे शरीर से अवश्य तनिक शिथिल हुई हैं लेकिन उनकी कलम न थकी है, न रुकी है। प्रस्तुत पुस्तक में उनके सम्पूर्ण कृतित्व और व्यक्तित्व का आकलन हिन्दी साहित्य के प्रख्यात आलोचकों, समीक्षकों, लेखकों एवं मित्रों द्वारा बड़ी सूक्ष्मता और गहराई से किया गया है।

सम्पूर्ण पुस्तक पाँच खण्डों में विभाजित है। प्रथम खण्ड में उनके जीवन और व्यक्तित्व का आकलन है। प्रसिद्ध लेखिका सूर्यबाला से एक संवाद में वे कहती हैं- ‘मुझे देखो, एक अकेली उदास शाम सी ज़िन्दगी।’ दूसरे खण्ड में उनके उपन्यासों पर देश के नामवर आलोचकों द्वारा समय-समय पर लिखी समीक्षाएँ हैं। तीसरे खण्ड में उनकी सम्पूर्ण कहानियों एवं कहानी संग्रहों पर अलग-अलग पत्रिकाओं में प्रकाशित टिप्पणियाँ व समीक्षाएँ हैं। चतुर्थ खण्ड में लेखिका की अतिचर्चित आत्मकथा ‘लगता नहीं है दिल मेरा’ में अकेली स्त्री का संताप पूरी शिद्दत से झलकता है। अंतिम खण्ड में उनके द्वारा लिखे रिपोर्ताज और लघुकथाओं पर सारगर्भित समीक्षाएँ एवं टिप्पणियाँ हैं। कुल मिलाकर यह पुस्तक कृष्णा अग्निहोत्री के लेखन और जीवन को गहराई से जानने व समझने का बृहद कोश है।

Additional information

Authors

Binding

Hardbound

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2015

Pulisher

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