

Kuch Padaav Kuch Manjilen

Kuch Padaav Kuch Manjilen
₹495.00 ₹372.00
₹495.00 ₹372.00
Author: Hemant Dwivedi
Pages: 238
Year: 2019
Binding: Hardbound
ISBN: 9788180319334
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
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Description
कुछ पड़ाव कुछ मंजिलें
साहबान ! मेरे तईं आदमी की ज़िन्दगी का सबसे बड़ा मकसद ख़ुद को समझना है। हम ख़ुद को समझे बिना ताज़िन्दगी दुनिया को समझते रहते हैं, ख़ुद को कोसते हैं, दुनिया पर लानत भेजते हैं। ‘सूटकेस में ज़िन्दगी’ में मैंने लिखा था कि ज़िन्दगी के सफर में आये पड़ाव आदमी की थकान कम करते हैं, उसे प्रेरणा देते हैं, उसे ऊर्जा देते हैं। अगर सबसे अहम् मंज़िल ख़ुद को समझना है, तो कुछ दरम्यानी मंज़िलें भी हैं। जो आदमी को ज़िन्दगी के मकसद मुहैया कराती हैं।
दानिशमन्द कहते हैं कि हम लम्हों में जीते हैं। कोई लम्हा ख़ुशी का वायस है तो कोई लम्हा ग़म से सराबोर कर देता है। ठीक ऐसे ही जनाब, कोई शख्स सीधे जिन्दगी के सबसे बड़े मकसद तक नहीं पहुँचता। कितने ही बीच के पड़ाव, मंज़िल पर कर ही वह उस इमारत की छत पर पहुँचता है, जहाँ इन्सान का सबसे बड़ा मकसद रहता है। इनमें से ही कुछ पड़ाव, कुछ मंजिलों का ज़िक्र इस किताब में है।
‘सूटकेस में ज़िन्दगी’ की प्रवाहमयी भाषा एवं लोकशैली (किस्सागोई) का जिक्र न भी करें तो भी कहा जा सकता है कि उससे चार दिशाओं में अभिव्यक्ति की गयी है – रेखाचित्र, संस्मरण, आत्मकथा, यात्रावृत्त। लेकिन ‘कुछ पड़ाव, कुछ मंज़िलें’ में ज़िन्दगी का सफर नहीं है, ज़िन्दगी रुक-सी गयी है-कुछ पल के लिए। जैसे किसी सराय में नये लोग मिल जाते हैं जिनमें से कुछ को हम याद रखते हैं या बिलकुल याद नहीं रखना चाहते या हमें वही आदमी मिल जाता है, जिसकी हमें तलाश थी, (या जिसकी हमें बिलकुल तलाश नहीं थी) ठीक वैसे ही ‘कुछ पड़ाव, कुछ मंजिलें’ के पहले भाग में भी ऐसे ही लोगों के रेखाचित्र हैं, जिसे ‘एलबम’ नाम दिया गया।
ये लोग बहरहाल कोई महापुरुष नहीं, साधारण लोग हैं, जिन्होंने अपनी लगन, संकल्प, समर्पण से अपने को असाधारण बना लिया। मगर…लगन, संकल्प, समर्पण के अतिरिक्त क्या कुछ भी लाज़िम नहीं ? जी हाँ, आपने ठीक उसी बात को पकड़ा है, जो मेरे मुँह में आयी है। मानव-मूल्यों पर आधारित यदि आचरण नहीं तो लगन, संकल्प, समर्पण कितनी दूरी तक साथ निभायेंगे। कहने की बात नहीं कि महापुरुष पैदा नहीं होते, अपने कार्य तथा आचरण से बनते हैं। वैभवशाली, दौलतमन्द और शक्तिसम्पन्न महानता की परिधि में जल्द ही शामिल किये गये हैं। मगर मेरी नज़र में भारत में हमेशा ही शान्त भाव से कर्म करनेवाला ही सम्मान का पात्र होता था। आचार्य हजारीप्रसाद दिवेदी कहते हैं कि महान् वह है जिनके निकट जाने पर दूसरे को अपनी सम्भावनाओं पर विश्वास बढ़ता है।
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| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2019 |
| Pulisher |









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