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Description
कुछ यूँ रचती है हमें किताब
किसी भी लोकतांत्रिक समाज में शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों को शिक्षा और ज्ञान के निकट लाना है, किंतु कभी-कभी इस शिक्षा व्यवस्था की अंतर्भूत खामियों की वजह से अनेक बच्चे स्कूल और शिक्षा से विमुख हो जाने पर विवश हो जाते हैं। प्रस्तुत पुस्तक के नायक ‘रामजी’ का भी स्कूल-अनुभव स्कूल के शिक्षकों के नकारात्मक व्यवहार के कारण किसी दुःस्वप्न सरीखा हो गया था। किंतु जीवन में कभी ऐसा भी होता है कि एक ‘किताब’ एक बच्चे की स्कूल-विमुखता और ज्ञान एवं शिक्षा के प्रति कृत्रिम रूप से निर्मित दूरी एवं डर को न केवल समाप्त कर देती है, वरन उसे स्कूल, शिक्षकों, पुस्तक और पठन से दोस्ती भी करवा देती है। कैसे स्कूल से डरा और भागा हुआ कक्षा का सबसे फिसड्डी छात्र पुनः कक्षा में लौट आता है, और न केवल कक्षा का अव्वल छात्र बनता है, बल्कि स्कूली समय में ही एक कथाकार, एक लेखक भी बन जाता है इसे इस किताब को पढ़कर बखूबी जाना और समझा जा सकता है।
Additional information
| ISBN | |
|---|---|
| Authors | |
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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