Madhyavarti Bharat Ke Mithak
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Description
मध्यवर्ती भारत के मिथक
‘मध्यवर्ती भारत के मिथक’ पाठकों को मध्य भारतीय जनजातियों के अनूठे मानस, उनकी अनसुनी-अनजानी मौखिक परम्पराओं और जीवन-दर्शन को समझने की एक प्रामाणिक खिड़की प्रदान करती है।
क्या इतिहास केवल तारीख़ों और राजाओं के दस्तावेज़ों में सिमटा है, या यह उन लोक-कथाओं में जीवित रहता है जिन्हें सदियों से आदिम संस्कृतियों ने सँजोया है? यह पुस्तक इसी बुनियादी सवाल का जवाब ढूँढ़ती है और आदिम समाज के एक ऐसे विस्मृत संसार को उजागर करती है जहाँ लोक-परम्पराएँ ही इतिहास का मूल आधार हैं।
अपनी गहन विषय-वस्तु और मौलिक नृवंशवैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण, यह पुस्तक विद्यार्थियों, शोधार्थियों और प्रोफ़ेसरों से लेकर जिज्ञासु पाठक मात्र तक के लिए अत्यन्त लाभकारी सिद्ध होगी। यह लोक-साहित्य, इतिहास और मानवविज्ञान के क्षेत्र में नये अकादमिक विमर्श की राह खोलती है और शोध के लिए एक उत्कृष्ट सन्दर्भ ग्रन्थ की भूमिका निभाती है।
यदि आप आदिम संस्कृतियों के रहस्यों और मौखिक इतिहास को गहराई से खँगालना चाहते हैं, तो यह ज्ञानवर्धक कृति आपके पुस्तकालय का सबसे अनिवार्य हिस्सा बनने जा रही है। आइए, मध्य भारत की आत्मा और उसके अकादमिक महत्त्व को इन मूल मिथकों के ज़रिये दोबारा खोजें !
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |











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