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Description
मजबूती का नाम महात्मा गांधी
आक्रामकता किसी भी कीमत पर खुद को बचाए रखने की प्रेरणा से उत्पन्न होती है और यही प्रेरणा कायरता का भी स्रोत है। यदि आप दूसरे को ध्वस्त करके स्वयं को नहीं बचा सकते तो भागकर बचाते हैं। कायरता और अहिंसा पर्यायवाची नहीं हैं, हिंसा और कायरता एक-दूसरे की पूरक हैं। इसलिए गांधी की अहिंसा न कायरता है, न मजबूरी; वह एक सचेत संकल्प है ताकत, हिंसा और अविवेक की आँधी के सामने अचल खड़े रहने का।
गांधी नामक भाव के आधारभूत मूल्यों, खासतौर पर अहिंसा को लेकर पुरुषोत्तम अग्रवाल लम्बे समय से सोचते रहे हैं। इसी चिन्तन का नतीजा है वह सूत्र जो इस पुस्तक का शीर्षक है ‘मजबूती का नाम महात्मा गांधी’ जिसने हर खासो-आम में स्वीकृत उस मुहावरे को एकदम पलट दिया जिसके मुताबिक महात्मा गांधी एक मजबूरी का नाम हैं। वे कहते हैं कि वे अगर मजबूरी हैं तो सिर्फ उन लोगों के लिए जिनके पास गांधी की मजबूती की कोई काट नहीं है, जो उनसे नफरत करते हुए भी उनको अनदेखा नहीं कर सकते। वे इस तथ्य पर भी जोर देते हैं कि गांधीजी की अहिंसा धार्मिक परम्पराओं में बताई गई अहिंसा नहीं है, वह उनकी मौलिक जीवन-दृष्टि है जो करुणा और संयम पर टिकी है। उनके लिए वह ऐसा मूल्य है जो किसी भी परिस्थिति में त्याज्य नहीं है, क्योंकि उससे मनुष्य का भविष्य जुड़ा है।
‘मज़बूती का नाम महात्मा गांधी’ शीर्षक जो व्याख्यान पुरुषोत्तम अग्रवाल ने 2005 में गांधी- जयन्ती के अवसर पर दिया था, और अपनी मौलिक दृष्टि के चलते जो बार-बार सुधीजन का ध्यान खींचता रहा है, इस पुस्तक में उसके अलावा उनके वे आलेख भी संकलित हैं जो उन्होंने गांधी-विचार के अन्य पहलुओं पर सोचते हुए समय-समय पर लिखे हैं।
देश और धर्म दोनों को हिंसा से ही व्याख्यायित करने को व्याकुल हमारे इस समय में गांधी की अहिंसा के अर्थ को खोलने वाली यह किताब एक जरूरी हस्तक्षेप है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |











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