Marxvad Aur Pragatisheel Sahitya
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Description
मार्क्सवाद और प्रगतिशील साहित्य
प्रगतिशील हिन्दी आलोचना का इतिहास डॉ. रामविलास शर्मा के लेखन का इतिहास है। चौथे दशक के उत्तरार्द्ध से अब तक-लगभग 50 वर्षों की लेखन अवधि में रामविलास जी ने मध्यकालीन पद्धति विकसित की है। यह पद्धति अचानक विकसित नहीं हुई है, इसके लिए उन्हें प्रतिगामी भाववाद से यथार्थवाद के लिए लम्बा संघर्ष करना पड़ा है। यह पुस्तक उसी ऐतिहासिक संघर्ष का जीवन्त दस्तावेज़ है।
पुस्तक पढ़ते हुए आप महसूस करेंगे कि इसमें समझौता-परस्त लचीलापन और कठमुल्लावाद से अलग एक यथार्थवादी क्रान्तिकारी दृष्टि है जिसके तहत साहित्य की आलोचना अन्ततः समाज की आलोचना बन जाती है। इसलिए आज साहित्य के नये दौर में मार्क्सवाद और प्रगतिशील साहित्य का प्रकाशन सही दिशा में की गयी एक पहल है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2017 |
| Pulisher |











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