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Mathura Ke Chaturvedi
₹350.00 ₹263.00



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₹350.00 ₹263.00
Author: Heramb Chaturvedi
Pages: 200
Year: 2025
Binding: Paperback
ISBN: 9789349180437
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
मथुरा के चतुर्वेदी
‘माथुर-चतुर्वेदी’ ‘प्रारम्भिक आर्य’ थे, जिन्होंने इस भारत-भूमि को आबाद किया था। उन्होंने अपने बौद्धिक, सांस्कृतिक सैन्य एवं राजनीतिक श्रेष्ठता के चलते, न केवल अपने प्रभुत्व की स्थापना की थी, अपितु, अपनी संस्कृति को भारत में प्रचलित करके अग्रणी संस्कृति और, अन्ततः, प्रभावी या मुख्य-धारा की संस्कृति के रूप में स्थापित कर दिया। हालांकि, उन्होंने उस भूमिका से अपने प्रभुत्व की स्थापना भारत में की थी, जिसे हम बाद के कालों में ‘ब्रह्म-क्षत्रिय’ की भूमिका के रूप में चिन्हित करते हैं, किन्तु, उनका योगदान न केवल आर्य संस्कृति का प्रचार-प्रसार था, अपितु, उस संस्कृति के ग्रन्थों की रचना का भी था! अतः, वे ‘पुरोहित-राजन’ की भूमिका में ही दिखाई देते हैं। मनु-उत्तर काल में समाज के सर्वोच्च पद पर प्रतिष्ठित हुए, क्योंकि, वे अपने हाथ से न्यायविद की भूमिका नहीं जाने देना चाहते थे। ये वही लोग थे, जो टेथिस सागर के समापन पर उभरे नवीन स्थल पर आर्य संस्कृति के प्रथम प्रचारक थे।
| Authors | |
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| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |
हेरम्ब चतुर्वेदी
हेरम्ब चतुर्वेदी का जन्म 31 दिसम्बर, 1955 को इंदौर में हुआ था। उनकी प्रारंभिक से उच्च शिक्षा सब, इलाहबाद में संपन्न हुई। इलाहबाद विश्व विद्यालय से 1976 में बी.ए. तथा 1978 में एम.ए. प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण। जनवरी, 1980 से इसी विश्व विद्यालय में अध्यापन, सम्प्रति इतिहास विभाग में प्रोफ़ेसर के रूप में कार्यरत। आपने आठ पुस्तकों का लेखन किया, जिनमें से दो (‘मध्यकालीन भारत में राज्य और राजनीति’) को उत्तर प्रदेश हिंदी संसथान का वर्ष 2003 एवं 2005 का ‘आचार्य नरेन्द्र देव’ पुरस्कार प्राप्त। ‘दिनमान टाइम्स’, ‘सन्डे आब्जर्वर’, ‘साहित्य अमृत’, ‘मनोरमा’, ‘गंगा-जमुना’ सहित अनेक पत्रिकाओं में लेख आदि प्रकाशित। रेडियो, दूरदर्शन, ज्ञान वाणी पर निरतर वार्ताओं का प्रसारण।

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