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Description
ओह अमेरिका
‘ओह अमेरिका’ में एक चरित्र है विवेक । कायाहीन अन्तर्वाणी का काविक पुनर्जन्म। वह देश काल निरपेक्ष है। वह सब समय, सब जगह मौजूद रहता है। वह सदा सबके साथ है और सबमें है। वह बोलता भी है, सलाह भी देता है। सत् और असत् का अन्तर बताता है। चेतावनी देता है। कभी-कभी कटाक्ष करता है। कभी उसकी बात सुनी जाती है। कभी कभी वह बोलता रहता है-लेकिन सुनकर अनसुना कर दिया जाता है। कभी उसकी आवाज दवा दी जाती है। कभी हमेशा के लिए शान्त कर दी जाती है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2005 |
| Pulisher |











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