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Description
पाकिस्तान में लोकतंत्र
भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हो गया किंतु पाकिस्तान में ऐसा न हुआ। बस काम चलाऊ संविधान बने जिन्हें कोई भी शासक अपनी मर्जी से तोड़ता-मोड़ता रहा। पाकिस्तान का यह भी दुर्भाग्य था कि पाकिस्तान के निर्माता जिन्ना की मृत्यु विभाजन के एक वर्ष बाद ही हो गई। पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान की रावलपिण्डी में हत्या कर दी गई। बस यही सिलसिला चलता रहा लोकतंत्र के गले पर चाकू रेतने का। पाकिस्तान में सेना की घुसपैठ बढ़ती गई। इस बीच कितने प्रधानमंत्री बदले। जनरल अयूब खान ने 1962 में एक संविधान प्रस्तुत किया था उसमें नियंत्रित और निर्देशित लोकतंत्र का मजबूत पक्ष रखा गया था। लेकिन अब तक तो यह परम्परा ही बन चुकी थी कि पाकिस्तान में जो भी सेना का मुखिया होता था वह लोकतांत्रिक तरीकों से चुनी सरकार को बर्खास्त कर सैन्यशासन स्थापित कर लेता था और अंत में कठपुतली बने राष्ट्रपति को हटा स्वयं राष्ट्रपति बन जाता था। पाकिस्तान में लोकतंत्र की नींव सदा ही से बेहद कमजोर थी और निरंतर कमजोर हो रही है। लेकिन आश्चर्य कि वहाँ कि जनता इसे कैसे स्वीकार करती चली आई है ? या वह मान चुकी है कि लोकतंत्र पाकिस्तान की किस्मत नहीं। पुस्तक में पाकिस्तान में लोकतत्र का पूरा इतिहास रोचक भाषा शैली में दिया गया है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2021 |
| Pulisher |











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