Parde Par Sahitya : Sahityik Rachnaon Ke Cinemai Rupantaran Ka Adhyayan
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परदे पर साहित्य : साहित्यिक रचनाओं के सिनेमाई रूपान्तरण का अध्ययन
भारतीय सिनेमा में साहित्यिक कृतियों पर फ़िल्में बनाने की परम्परा बहुत समृद्ध नहीं रही है, फिर भी बीच-बीच में कुछ उत्कृष्ट फ़िल्मकारों ने उपन्यासों, कहानियों और नाटकों को लेकर फ़िल्में बनाई हैं। ‘परदे पर साहित्य’ पुस्तक में ऐसी सत्रह फ़िल्मों का विस्तृत विवेचन किया गया है। इनमें ‘देवदास’, जिस पर दो महत्त्वपूर्ण फ़िल्में बनीं, ‘आनन्दमठ’, ‘पथेर पांचाली’, ‘काबुलीवाला’, ‘चित्रलेखा’, ‘सारा आकाश’, ‘संस्कार’ और ‘तमस’ जैसी चर्चित कृतियों पर बनीं फ़िल्में शामिल हैं।
विख्यात फ़िल्म-समीक्षक जवरीमल्ल पारख अपनी विवेचना में न सिर्फ़ यहाँ मूल रचना का विस्तृत परिचय उसके ऐतिहासिक और साहित्यिक आयामों के साथ देते हैं, बल्कि उस पर बनी फ़िल्म के इतिहास और उसके तकनीकी पक्षों पर भी विस्तार से विचार करते हैं। फ़िल्मकारों ने क्या देखकर किस रचना को चुना, फिर कैसे उसे अपनी फ़िल्म के अनुकूल बनाया, उसमें से क्या छोड़ा और अपनी बात पूरी तरह कहने के लिए उसमें क्या जोड़ा, और अंततः फ़िल्म का क्या रूप बना और दर्शकों ने उसे कैसे लिया; वे यह सब बताते हैं; और इस तरह यह किताब फ़िल्मों की रचना-प्रक्रिया के बारे में जानने को उत्सुक पाठकों के लिए भी विशेष हो जाती है।
साहित्य और सिनेमा, दोनों पर उनकी समान पकड़ है जिसके चलते यह विश्लेषणात्मक पुस्तक साहित्य के अध्येताओं के लिए जितनी उपयोगी है, सिने जगत में प्रवेश के इच्छुक युवाओं के लिए, उनकी रचनात्मक तैयारी के लिए भी उतनी ही ज़रूरी है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |











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