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Description
पश्चिम से संवाद
संसार के मानव समुदायों और राष्ट्रों का वर्तमान बीती सदियों का जिजीविषा के मोहक संघर्ष का अद्यतन है। एक मानव समुदाय द्वारा दूसरे को अधीन करने या अन्य को दासता का भोग करने की कामना अत्यन्त प्राचीन है। किन्तु इसके साधन और उपकरण एक जैसे नहीं होते। आज ये उपकरण इतने महीन और सूक्ष्म हैं कि इनकी पहचान करना सामान्यत: सरल नहीं है। इनमें सर्वाधिक दक्ष है और प्रचलित है—अन्य के सपनों और आकांक्षाओं के टेक्सचर पर नियंत्रण मुख्यतः संस्कृति में घटित होने वाली इन प्रक्रियाओं का प्रकटन भाषा और साहित्य में सर्वाधिक प्रामाणिक और स्थायी होता है। भारत के बारे में सोचते हुए और हिन्दी समाज को गुजरते हुए जब कुछ समकालीन प्रश्नों से संवाद करते हैं तो धर्म और संस्कृति तथा भाषा और साहित्य के कई रूपक व्याख्यायित करने पड़ते हैं और बात बहुत दूर तक जाती है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2020 |
| Pulisher |











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