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Prithivi Pradakshina
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पृथिवी-प्रदक्षिणा
“पराधीन सपनेहूं सुख नाहीं”
“… मैं काशी लौट आया। काशी में तत्कालीन कमिश्नर और गवर्नर से बातचीत हुई। उन्होंने सहानुभूति दिखाने और माफी माँगने की जगह उलटा भला बुरा कहकर दुख, क्षति और नुकसान के साथ अपमान की वृद्धि की। इसका परिणाम मैंने अपने मन में यही निकाला कि पराधीन सपनेहूं सुख नाहीं।”
“शान्ति योर अमरीका की शक्तियों के आपस के समझौते का नाम नहीं है। संसार में उस समय तक शान्ति स्थापित नहीं हो सकती जब तक कि इस जगत् में एक भी मनुष्य मानव नाम को कलंकित करने के लिए दूसरों का दासत्व स्वीकार किये रहेगा।”
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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