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Description
कर्जे तहजीब एक दुनिया है
हमारे बीच इधर जिन कवियों के रचना-कर्म को गहरी उत्सुकता और उम्मीद के साथ देखा गया है, उनमें डॉ. विनय कुमार भी हैं। उन्होंने बाक़ी सबसे भिन्न रास्ता चुना है। हिन्दी-उर्दू के दोआब को अपनी भूमि मानकर उन्होंने कुछ अनूठी कविताएँ रची हैं। इनमें उनका अपना अनुभव सार रूप में प्रगट होता है। दिल्ली के अनुभव से लेकर गाँव-जवार और देश-दुनिया के प्रसंग यहाँ समाहित हैं। साथ-साथ समसामयिक विषयों एवं जीवन-तथ्यों, राजनीतिक-सामाजिक सन्दर्भों पर उनकी बेलाग, तिलमिला देनेवाली टिप्पणियाँ भी दर्ज होती चलती हैं। विवरणों-ब्योरों का ढेर लगाने के बजाय डॉ. विनय कुछ चुनिन्दा बिम्ब निर्मित करने की कोशिश करते हैं जो वास्तव में अनुभवों का सारांश होते हैं। डॉ. विनय भाषा को अपने ढंग से बरतते हैं—उर्दू-बहुल शब्दों-मुहावरों से जड़ी उनकी भाषा एक ही साथ अनलंकृत, सादी भी है और मीनाकारी से जगमग भी।
कवि विनय कुमार पेशे से मनोरोग-चिकित्सक हैं। हमारी भाषा में ऐसे कवि विरल हैं जो मनोरोग-चिकित्सा में भी यशस्वी हों। इस क्षेत्र में उनके अनुभव अभी कविता में विस्तार से आने को शेष हैं, लेकिन जहाँ-तहाँ उन अनुभवों की पदचाप, उनकी नेपथ्य-झंकार अवश्य सुनी जा सकती है। जटिल मनोगुत्थियों से उलझनेवाले डॉ. विनय कुमार का मुख्य ध्येय इन कविताओं में अपनी बात का सम्प्रेषण है जिसमें वह हमेशा ही अप्रत्याशित रूप से सफल होते हैं। उनकी कविता अपना सम्पूर्ण अर्थ-कोष एक ही पाठ में खोल देती है। ऐसी सम्प्रेषणीयता कविता को साधारण पाठकों के लिए सुगम तो बनाती ही है, साथ ही कविता को वैचारिक हथियार की क्षमता भी प्रदान करती है। डॉ. विनय कुमार की कविता की गुफ़्तगू अवाम से है।
— अरुण कमल
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |











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