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Sarnami HIndi Hindi Ka Vishwa Falak
₹300.00 ₹270.00



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Author: Bhavana Saxena, Vimlesh Kanti Verma
Pages: 262
Year: 2021
Binding: Paperback
ISBN: 9788123797861
Language: Hindi
Publisher: National Book Trust
सरनामी हिंदी हिंदी का विश्व फलक
सदियों-शताब्दियों पूर्व औपनिवेशिक शासन द्वारा जब हजारों भारतीयों को एक ‘एग्रीमेंट’ के तहत मॉरीशस, फीजी, सूरीनाम सरीखे सुदूर और छोटे-छोटे द्वीपीय देशों में ले जाया गया तो भी इन ‘गिरमिटियाँ’ (‘एग्नीमेंट का अपभ्रृंश गिरमिट) ने अपनी भाषा, धर्म और संस्कृति को नहीं छोड़ा। इस पुस्तक में सूरीनाम के विशेष संदर्भ में ‘सरनामी हिंदी’, जो इन देशों के भारतवंशियों की मिश्चित और अपभ्रंशित हिंदी है, के फैलाव और विस्तार के संबंध में बताया गया है। इस क्रम में, प्रवासी भारतीय समाज की उन देशों के भूगोल और संस्कृति के अनुरूप अनेक भाषा समुदायों के संपर्क में आकर हिंदी में आए बदलाव को भी रेखांकित किया गया है। सरनामी हिंदी में रचित साहित्य के कुछ नमूने इस पुस्तक में दिये गए हैं। साथ ही, ‘दस्तावेज’ के अंतर्गत कुछ साक्षात्कार एवं प्रेस की कतरनें, तथा सरनामी के बारे में प्रकाशित महत्वपूर्ण अभिलेखीय सामग्री भी यहाँ दी गई है। सरनामी शब्दावली और भाषा के नमूने पुस्तक को और समृद्ध करते हैं। प्रवासी हिंदी-रूप ‘सरनामी’ पर हिंदी में संभवतः यह पहली पुस्तक ही है।
| Authors | |
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| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2021 |
| Pulisher |
विमलेश कांति वर्मा
लब्धप्रतिष्ठ भाषा वैज्ञानिक डॉ. विमलेश कांति वर्मा विदेशों में हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के प्रबल उन्नायक हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में भाषा विज्ञान और हिंदी भाषा तथा साहित्य का लगभग पाँच दशकों तक अध्यापन करते हुए आपने कनाडा, बल्गारिया तथा फौजी में हिंदी प्राध्यापक और वरिष्ठ राजनयिक के रूप में प्रतिनियुक्ति पर रहकर हिंदी की प्रभूत सेवा की है और अब स्वदेश में रहकर आज भी कर रहे हैं। आप रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड (लंदन) के फेलो भी हैं। हिंदी भाषा के वैश्विक स्तर पर आपके द्वारा किये गए प्रचार-प्रसार के कारण आप भारत के राष्ट्रपति के हाथों ‘महापंडित राहुल सांकृत्यायन सम्मान’ तथा उत्तर प्रदेश सरकार के ‘हिंदी विदेश प्रसार सम्मान’ से सम्मानित भी हो चुके हैं।

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